
सीएम ने की वन की देवी की पूजा
सुंदरवन की बनबीबी पर सदियों से सर्वधर्म की आस्था
कोलकाता. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंगलगंज में जाकर बनबीबी की पूजा की। कौन हैं ये बनबीबी। जिनकी पूजा और सम्मान विश्व के इस सबसे बड़े डेल्टा में रहने वाले सभी धर्मों के लोग करते हैं। दुनिया के सबसे खतरनाक शिकारियों रॉयल बंगाल टाइगर, मगरमच्छ जैसे शिकारियों वाले सुंदरवन के लोक जीवन पर सर्वाधिक प्रभाव डालने वाले लोकदेवी बनबीबी से जुड़ी रिपोर्ट।
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सुरक्षा कवच हैं बनबीबी
बाघों की दहाड़ और मगरमच्छ के खतरे के बीच सुंदरवन के घने जंगलों में आज भी बनबीबी के मंदिरों की मौजूदगी हिंदू -मुस्लिम एकता की बानगी और सर्वधर्म समभाव की कहानी कहती है। सदियों से इन जंगलों में जाने वाले लोग बनबीबी की पूजा अर्चना कर रहे हैं। वो भी बिना धार्मिक भेदभाव के। शहद, जलाऊ लकड़ी, मछली, केकड़े पकडऩे के लिए जंगल और छोटी छोटी धाराओं और दलदली जंगल में जाने वाले स्थानीय लोगों के लिए आज भी बनबीबी एक तरह का सुरक्षा कवच है जो उन्हें मानसिक रूप से जंगल के खतरों से दूर रखती है। जंगल के भीतरी इलाकों में आज भी अस्थाई रूप से बांस, बल्लियों से तैयार की गई संरचनाओं में झूलते रंग बिरंगे धार्मिक झालर उसी बनबीबी की आराधना के निशान हैं। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि बनबीबी उन्हें जंगल में बाघ और मगरमच्छ के खतरे से बचाती हैं। शहद व अन्य वनोपज संग्रहण करने में मदद करती हैं। यही वजह है कि जंगल जाने से पहले लोग बनबीबी के मंदिरों और पूजा स्थलों पर सिर झुकाना नहीं भूलते।
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सदियों से है परंपरा
बनबीबी का शाब्दिक अर्थ है जंगल की महिला। लेकिन सुंदरवन में उसे देवी का रूप दिया गया है। सदियों से जंगल जाने वाले स्थानीय लोग ऐसा मानते हैं कि जंगल में वे बनबीबी की निगरानी में रहते हैं। इसलिए बुरी शक्तियों से महफूज रहते हैं। लोककथाओं के मुताबिक बनबीबी ने अपने समय दक्षिण के राजा दक्षिण राय के अत्याचार से स्थानीय लोगों को बचाया था। कथाओं के मुताबिक उन्होंने दक्षिण राय का वध नहीं कर उन्हें इस बात के लिए सहमत कर लिया था कि अब से बनबीबी के साथ दक्षिण राय की भी पूजा होगी, और जो लोग दोनों की पूजा करेंगे दक्षिण राय ऐसे लोगों का बाघ बनकर शिकार नहीं करेंगे।
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रॉयल बंगाल टाइगर के लिए जाना जाता है सुंदरवन
पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की सीमा पर स्थित सुंदरवन अपने खूबसूरत मैंग्रोव जंगलों के साथ साथ रॉयल बंगाल टाइगर और मगरमच्छों के लिए भी जाना जाता है। वनोपज संग्रह के लिए जंगल में जाने वाले स्थानीय लोग बाघों के हमले में अक्सर घायल होते हैं। स्थानीय लोग तरह तरह के उपाय कर खुद को जंगली जानवरों के हमले से बचाव के प्रयास में रहते हैं।
Published on:
04 Dec 2022 07:25 pm
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