
कोलकाता. एशिया की सबसे बड़ी जिस्ममंडी में काम करने वाली यौनकर्मी भी समाज के लिए मिसाल कायम करती हैं। वे उन लड़कियों और महिलाओं को बचाती हैं, जो वेश्यालय के दलदल में फंस जाती हैं।
कोलकाता के बहुबाजार की एकयौनकर्मी विशाखा लस्कर सहित कई यौनकर्मी हैं, जो समाज को एक आईना दिखाते हुए मिसाल के तौर पर काम करती हैं। केवल विशाखा ही नहीं बल्कि कोठों से बचाने के लिए एक बोर्ड की स्थापना की गई है, जिसमें यौनकर्मी ही नहीं बल्कि कई अन्य लोग भी शामिल हैं। जिस्मफरोशी के दलदल में फंसी नाबालिग समेत महिलाओं को बचाने के लिए काम करते हैं।
2001 में बना बोर्ड
मालूम हो कि सेक्स वर्कर्स एक ऐसा स्वायत्त बोर्ड चलाती हैं, जिसके जरिए उन महिलाओं और नाबालिग लड़कियों को बचाया जाता है, जिन्हें जबरन शोषण के इस दलदल में उतार दिया जाता है। हालांकि, इस बोर्ड में सिर्फ यौनकर्मी ही शामिल नहीं है बल्कि समाज के अन्य लोग जैसे कि स्थानीय विधायक, पुलिस अधिकारी, फिजिशन, वकील समेत कई एनजीओ के सदस्य भी हैं। इस बोर्ड का संचालन वर्ष 2001 में शुरू किया गया था और अब तक इसके जरिए 1085 पीडि़ताओं को बचाया जा चुका है। जिसमें 863 नाबालिग शामिल हैं।
बचाने में तैयार हो जाते हैं दुश्मन
यही नहीं बोर्ड की सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि सुप्रीम कोर्ट के एक पैनल ने निर्देशित भी किया है कि सभी रेडलाइट क्षेत्रों में इसी बोर्ड की तरह नजीर तैयार की जाएं, जो समाज को बेहतर बनाने के लिए काम करें। वेश्यालयों से महिलाओं को बचाना कोई आसान काम नहीं है। इस बोर्ड के अधीन काम करने वाले कई यौनकर्मियों का कहना है कि कई बार मुश्किलों का सामना भी करना पड़ता है। लड़कियों को इस दलदल से बचाने में कई दुश्मन भी तैयार हो जाते हैं।
क्या कहती हैं ...
यौनकर्मी विशाखा लस्कर कहती हैं कि हम हमेशा लड़कियों को बचाने की कोशिश करते हैं और उन्हें उनके परिवारवालों को सौंप देते हैं। यदि उन्हें सरकारी सुधारगृहों में ले जाया जाए तो उनकी जिंदगी और भी खराब हो सकती है। पहले हम पीडि़तों को अपने ही घर पर रखते थे लेकिन हमें इसके खराब अनुभवों से गुजरना पड़ा, जिसकी वजह से हमने ऐसा करना बंद कर दिया।
घर नहीं लौटना चाहती हैं ऐसी लड़कियां
दुर्बार महिला समन्वय समिति सदस्य डॉली साहा ने कहा कि एकबार हम जब हम एक लड़की को वेश्यालय से बचाने के लिए शेवड़ाफुली गए और उसे बनगांव ले गए जहां लड़की का परिवार रहता था। हालांकि, हमें बनगांव में काफी तलाश के बावजूद भी लड़की का घर नहीं मिला और न ही लड़की अपना घर तलाश कर पाई थी। दरअसल, वह लड़की अपने परिवार के पास वापस नहीं लौटना चाहती थी, जिसकी वजह से हमने उसे पुलिस को सौंप दिया।
पैसे कमाने के लिए दलदल का सहारा
चेतला पल्ली की नमिता मुखर्जी एक और मामला बताती हैं जब बर्दवान के दुर्गापुर से एक अच्छे खासे परिवार की पढ़ी लिखी महिला को एक वेश्यालय से बचाया गया। उन्होंने पैसे कमाने के लिए देह व्यापार के धंधे में शामिल होने का फैसला किया था। बोर्ड सदस्यों ने पहले उनकी काउंसलिंग की और फिर उनके घर का पता लगाकर उन्हें वापस पहुंचाया।
साझा किया अनुभव
विशाखा ने बताया कि एक नेपाली लड़की ने जानबूझकर अपना घर बोर्ड के सदस्यों को नहीं दिखाया। कुछ दिनों पहले एक स्कूली लड़की, जो कि शायद माध्यमिक परीक्षा 2018 में शामिल होने वाली थी, उसे सोनागाछी से बचाया गया था। बता दें कि सोनागाछी कोलकाता का जाना-माना रेडलाइट एरिया है। बोर्ड सदस्यों ने हर संभव कोशिश की कि वह उस लड़की का पता लगा सकें लेकिन उनका प्रयास व्यर्थ रहा। वह लड़की अपने माता-पिता के पास नहीं लौटना चाहती थी। इसके बाद लड़की को पुलिस के हवाले कर दिया गया था।
एक ऐसा अनुभव भी
स्थानीय और सक्रिय बोर्ड सदस्य गुरुदस्ती बताती हैं, कि एक बार नाबालिग लड़की को बचाकर परिवारवालों को सौंपा लेकिन लड़की परिवारवालों के साथ रहने को तैयार नहीं थी। इस दौरान लड़की ने शोर मचाकर कुछ स्थानीय युवकों को बुलाया और हमें तस्कर बता दिया, जिसकी वजह से हमारी पिटाई की गई और हमें एक कमरे में बंद कर दिया गया। कुछ वक्त बाद हमें पुलिस की मदद से बचाया गया।
Updated on:
17 Jan 2018 05:49 pm
Published on:
17 Jan 2018 05:44 pm
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