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कोलकाता पुलिस के इस घुड़सवार दस्ते का है लंबा इतिहास

माउंटेड पुलिस सुरक्षा बल है जो लगभग 180 सालों से महानगर कोलकाता की पहचान बना हुआ है।

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कोलकाता. महानगर कोलकाता औपनिवेशिक भारत की बहुत से विरासतों को अब भी संजोए हुआ है। ऐसा ही एक सुरक्षा बल है जो लगभग 180 सालों से महानगर कोलकाता की पहचान बना हुआ है। जिसे लोग माउंटेड पुलिस के नाम से जानते हैं। जिसे कोलकाता पुलिस का घुड़सवार दस्ता भी कहा जाता है। सन १८४० में स्थापित इस दस्ते को अभी भी भीड़ पर नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कोलकाता पुलिस और राज्य सरकार के आयोजनों में भी यह दस्ता बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेता है।

घोड़ों के प्रशिक्षण पर दिया जाता है विशेष ध्यान
दस्ते में शामिल किए गए घोड़ों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उनका प्रशिक्षण इस तरह होता है कि किसी भी परिस्थिति में वे इंसानों पर हमला न करें। स्थिति बहुत ज्यादा तनावग्रस्त होने पर भी घोड़े अपना आपा नहीं खोते बल्कि अपनी पीठ से उन लोगों को धक् का देते हैं जो गड़बड़ी फैलाते हैं। दस्ते में शामिल होने के लिए घोड़े की न्यूनतम उम्र 5 वर्ष निर्धारित की गई है। बल में घोड़ों की स्वीकृत संख्या98 है। वर्ष 2017 में 68 घोड़े दस्ते का हिस्सा थे।

पहले इंग्लैंड आस्ट्रेलिया से लाए जाते थे घोड़े
दस्ते से जुड़े पुलिस अधिकारी बताते हैं कि पहले इस दस्ते के ज्यादातर घोड़े इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया से मंगाए जाते थे। आजादी के बाद से लागत पर नियंत्रण के लिए उन्हें दिल्ली, पुणे, मुंबई, हरियाणा, पंजाब के फार्म से मंगाया जाता था। अब रायल कलकत्ता टर्फ क्लब की घुड़दौड़ से बाहर हो चुके घोड़े लिए जाते हैं। इसके साथ ही कोलकाता पुलिस के अस्तबल में भी आधा दर्जन घोड़ों का प्रजनन किया जा रहा है। यहां लाए गए घोड़ों की कीमत औसतन दो से ढाई लाख रुपए के बीच होती है।

फिल्मी सितारों को दिया है प्रशिक्षण
दस्ते से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक इस दस्ते के कई घोड़ों पर बॉलीवुड और टॉलीवुड के सितारों ने घुड़सवारी सीखी है। एश्चर्या राय ने फिल्म चोखेर बाली में दस्ते के घोड़े रूपमती की जीन संभाली तो बांग्ला के सुपरस्टार देव ने अपनी सुपरहिट फिल्म चांदेरपहाड़ में घुड़सवारी का दृश्य दस्ते के घोड़े प्रीतिलता का साथ लिया।