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जूट उद्योग पर इस तरह मेहरबान हुई मोदी सरकार

केन्द्र सरकार ने जूट उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अनाजों की 100 फीसदी पैकिंग जूट बैग में करने के साथ ही चीनी की 20 फीसदी पैकिंग भी जूट बैग में अनिवार्य करने को मंजूरी दी है।

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जूट उद्योग पर इस तरह मेहरबान हुई मोदी सरकार

-अनाज की 100 फीसदी पैकिंग जूट बैग में जरूरी

-सीसीईए की मंजूरी: चीनी की २० प्रतिशत पैकिंग जूट के बोरों में

नई दिल्ली.

केन्द्र सरकार ने जूट उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अनाजों की 100 फीसदी पैकिंग जूट बैग में करने के साथ ही चीनी की 20 फीसदी पैकिंग भी जूट बैग में अनिवार्य करने को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने गुरुवार को जूट पैकेजिंग मैटेरियल्स (जेपीएम) अधिनियम, 1987 के तहत अनिवार्य पैकेजिंग मानकों का दायरा बढ़ाने के व मंत्रालय खासकर जूट आयुक्त कार्यालय के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इससे पहले खाद्यान्न की 90 फीसदी पैकिंग ही जूट बैग में करना अनिवार्य था। इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन (ईजमा) ने केंद्र सरकार के निर्णय को जूट उद्योग को बचाने के लिए ठोस व सकारात्मक कदम बताया है। देशभर में लगभग 3.7 लाख श्रमिक और कई लाख परिवार जूट की खेती पर आजीविका के लिए निर्भरशील है। जूट बोरियों में चीनी की पैकिंग करने के निर्णय से जूट उद्योग के विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा। खाद्यान्न की पैकिंग के लिए जूट की बोरियों के 10 प्रतिशत ऑर्डर रिवर्स नीलामी के जरिए ‘जेम पोर्टल’ पर दिए जाएंगे। इससे धीरे-धीरे कीमतों में सुधार का दौर शुरू हो जाएगा। देश के पूर्वी एवं पूर्वोत्तर क्षेत्रों, विशेषकर पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम, आंध्र प्रदेश,मेघालय और त्रिपुरा में रहने वाले किसान एवं कामगार लाभान्वित होंगे। इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन (इज्मा) के चेयरमैन मनीष पोद्दार ने सरकार के फैसले को उद्योग, किसान और श्रमिकों के हित में बताया। उन्होंने कहा कि सरकार के रूख से स्पष्ट है कि जूट उद्योग को लेकर केंद्र की सोच सकारात्मक है।
जूट की गुणवत्ता एवं उत्पादकता बढऩे के आसार

सूत्रों ने बताया कि इस निर्णय से जूट उद्योग के विकास को बढ़ावा मिलेगा। देश में कच्चे जूट की गुणवत्ता एवं उत्पादकता बढऩे का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके साथ ही ना केवल जूट क्षेत्र का विविधीकरण होगा बल्कि देश में जूट उत्पाद की मांग भी बढ़ेगी। जूट उद्योग मुख्य रूप से सरकारी क्षेत्र पर ही निर्भर है, जो खाद्यान्न की पैकिंग के लिए प्रत्येक वर्ष 6500 करोड़ रुपए से भी अधिक मूल्य की जूट के बोरे खरीदता है। ताकि जूट उद्योग के लिए मुख्य मांग निरंतर बनी रही।