
19 साल बाद कोलकाता पहुंचीं तसलीमा नसरीन (Photo-IANS)
बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन 19 साल बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से कोलकाता में भावुक नजर आईं। शनिवार शाम एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "मैं सिर्फ शहर नहीं लौटी हूं, बल्कि अपनी जिंदगी के एक खोए हुए अध्याय में भी लौटी हूं।" उन्होंने कहा, "मैं 19 साल से कोलकाता से यह कहना चाहती थी। मैंने कभी कुछ गलत नहीं किया, फिर भी मुझे सजा दी गई और शहर से निकाल दिया गया। यूरोप ने मुझे नागरिकता और रहने की जगह दी, लेकिन अफसोस की बात है कि मुझे दोनों बंगाल में रहने के लिए थोड़ी-सी भी जगह नहीं मिल सकी।"
तस्लीमा ने कहा, "2007 में सरकार ने मुझे कोलकाता छोड़ने का आदेश दिया था। मैं जानना चाहती हूं कि मेरा गुनाह क्या था? जब किसी भी अदालत ने मुझे कभी सजा नहीं दी, तो फिर मुझे क्यों निकाला गया?" उन्होंने कहा, "अब मैं सिर्फ इतना कहना चाहती हूं- कोलकाता, मैं वापस आ गई हूं। इतिहास याद रखेगा कि दरवाजा किसने बंद किया था और यह भी कि उसे किसने खोला।"
अपने निर्वासन का जिक्र करते हुए तस्लीमा ने कहा, "बांग्लादेश सरकार ने 8 अगस्त 1994 को मुझे देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। तब से कई सरकारें बदलीं, लेकिन मैं पिछले 32 वर्षों से निर्वासन में हूं। मैंने हमेशा अपने देश को दिल में बसाए रखा। यूरोप ने मुझे नागरिकता और सुरक्षा दी, जिसके लिए मैं आभारी हूं।" उन्होंने सवाल उठाया, "क्या मैंने किसी की हत्या की थी या किसी का घर जलाया था? मैंने तो सिर्फ बराबरी की बात लिखी और कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज उठाई।"
तस्लीमा ने कहा, "मेरा देश सिर्फ एक नक्शा नहीं, बल्कि वहां के लोगों का प्यार है। आज बांग्लादेश में हालात भयावह हैं। आजाद ख्यालों वाले लोगों की हत्या की जा रही है या उन्हें जेल में डाला जा रहा है। मैं सपना देखती हूं कि एक दिन हालात बदलेंगे, धर्म और राज्य अलग-अलग होंगे तथा कानून और धर्म को अलग-अलग रखा जाएगा।"
तस्लीमा ने 2004 में कोलकाता लौटने और फिर 2007 में शहर छोड़ने की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नवंबर 2007 में तनावपूर्ण माहौल और तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के दबाव के कारण उन्हें एक बार फिर कोलकाता छोड़ना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनकी आत्मकथा 'द्विखंडित' (Split: A Life) के दूसरे भाग पर लगा प्रतिबंध कोलकाता हाई कोर्ट ने हटा दिया था। इसके बावजूद उन्हें शहर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने कहा, "मैंने कुछ भी गलत नहीं किया था, फिर भी मुझे निर्वासित कर दिया गया।"
रवींद्र सदन में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में तस्लीमा नसरीन का सम्मान किया गया। इस दौरान पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने उनका स्वागत किया और कहा कि जब भी वह कोलकाता आएंगी, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों ने 'जय श्री राम' के नारे भी लगाए। सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "तस्लीमा कल कोलकाता आईं और आज इस कार्यक्रम में शामिल हुई हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि यहां लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी फिर से स्थापित हुई है।"
कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य स्वप्न दासगुप्ता और भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल भी मौजूद थीं। स्वप्न दासगुप्ता ने कहा, "मैं वर्षों से तस्लीमा से सिर्फ दो शब्द कहना चाहता था- स्वागत है। 2006-07 में जब उन्हें वीजा संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था, तब भी मैं उनके समर्थन में खड़ा था। जिन परिस्थितियों में उन्हें कोलकाता छोड़ना पड़ा, वैसी स्थिति दोबारा कभी नहीं आनी चाहिए।" उन्होंने आगे कहा, "मैं यह नहीं कहता कि मैं उनकी हर बात या हर लेख से सहमत हूं, लेकिन मैं यह भी नहीं सोच सकता कि किसी को अपनी बात कहने का अधिकार न मिले।"
दासगुप्ता ने कहा, "दिल्ली में तस्लीमा मेरी पड़ोसी थीं। वह बंगाली में लिखती हैं और बंगाली में लिखने के लिए कोलकाता उनके लिए सबसे उपयुक्त जगह है। तस्लीमा, आपका हमारे बीच फिर से स्वागत है। मुख्यमंत्री ने भी भरोसा दिलाया है कि वह जब चाहें कोलकाता आ सकती हैं।"
Updated on:
02 Aug 2026 11:31 am
Published on:
02 Aug 2026 11:31 am
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