
एआई तस्वीर
कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामलों की सुनवाई के लिए पांच विशेष त्वरित अदालत गठित करने का आदेश दिया है। इससे मुकदमों की सुनवाई में तेजी आ सकती है और समयबद्ध तरीके से निर्णय सुनाया जा सकता है। इनमें से तीन अदालत कोलकाता में और दो, पोर्ट ब्लेअर में गठित की जाएंगी। हाईकोर्ट के एक आदेश के अनुसार ये अदालतें लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत मामलों की सुनवाई पूरी करेंगी और आरोपपत्र दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर अंतिम आदेश या फैसला सुनाएंगी।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देशभर में लोक परीक्षाओं में धोखाधड़ी के मामलों में मुकदमे में तेजी लाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, हाल में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर छात्रों का देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन भी हुआ था, जिसके कारण शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। इस विवाद के कारण केंद्र सरकार ने प्रश्नपत्र लीक को संगठित अपराध माना है, क्योंकि इससे लाखों छात्रों के भविष्य का निर्धारण करने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले हफ़्ते घोषणा की थी कि परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई के लिए त्वरित अदालतें गठित की जाएंगी।
कलकत्ता हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की ओर से 29 जुलाई को इस संबंध में एक प्रशासनिक आदेश जारी किया गया है। आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि इन त्वरित अदालतों का दर्जा और पद, पश्चिम बंगाल में प्रशासन के स्थायी रूप से काम कर रही 88 त्वरित अदालतों के बराबर नहीं होगा। ये अदालतें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और राज्य पुलिस जैसी एजेंसियों द्वारा लोक परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगी। इससे उन मामलों में होने वाली देरी कम होगी, जिनमें कई आरोपी होते हैं, बहुत सारे दस्तावेजी सबूत और डिजिटल फोरेंसिक सामग्री रहती है और जिनकी कानूनी कार्यवाही अक्सर लंबे समय तक चलती है।
वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) के परिणाम में गड़बड़ी का आरोप लगाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर याचिका दायर करने वाले अभ्यर्थियों के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) उचित समझे तो ऐसे अभ्यर्थियों के खिलाफ कानून के अनुसार अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई कर सकती है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने एनटीए की रिपोर्ट का अवलोकन किया।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि फर्जी और छेड़छाड़ किए गए ओएमआर शीट और स्कोरकार्ड के आधार पर कई याचिकाएं दायर की गई थीं। सुनवाई के दौरान एनटीए ने अदालत को बताया कि एक अभ्यर्थी ने तीन अलग-अलग परिणाम पत्र प्रस्तुत कर याचिका दायर की थी। एजेंसी के अनुसार उसके द्वारा दाखिल सभी दस्तावेज फर्जी और विकृत थे। एनटीए ने अदालत को बताया कि संबंधित अभ्यर्थी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उसे अगले तीन वर्षों तक परीक्षा में बैठने से प्रतिबंधित किया जाएगा।
एक अन्य अभ्यर्थी ने दावा किया था कि उसके परिणाम में 370 अंकों की गड़बड़ी की गई है। एनटीए ने जांच में इस दावे को भी निराधार और दस्तावेजों को फर्जी बताया। एजेंसी की रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित अभ्यर्थी ने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। मामले पर टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए न्यायालय को भी धोखा देने का प्रयास किया गया है। अदालत ने सभी संबंधित याचिकाएं खारिज करते हुए एनटीए को आरोपित अभ्यर्थियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की अनुमति दे दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
Updated on:
31 Jul 2026 09:34 pm
Published on:
31 Jul 2026 09:34 pm
