
सिंगुर में धान की नई प्रजाति पर शोध
- बाढ़ में भी फसल की क्षति नहीं होने का दावा
कोलकाता.
पश्चिम बंगाल में धान के विभिन्न प्रजाति के फलन पर लंबे समय की शोध के बाद कृषि वैज्ञानिकों ने हुगली जिले के सिंगुर में धान की नई प्रजाति को खोज निकाला है। इनमें से अधिकांश सुगंधी चावल (एरोमेटिक राइस) की प्रजाति माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार बाढ़ के दिनों में इसके फसल को नुकसान नहीं पहुंचेगा। हुगली के चुंचूड़ा स्थित राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन धान शोध केंद्र ने बाढ़ का पानी सहने वाले धान की प्रजाति पर शोध को अंजाम दिया है। अर्थात् बाढ़ आने पर धान का फसल बचाया जा सकता है। कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि वैज्ञानिकों ने प्रयोग के तौर पर आमन धान की एक ऐसी प्रजाति पर शोध किया है जिसके पौधे बाढ़ के पानी को भी बर्दाश्त कर सके। कृषि वैज्ञानिक डॉ. शीतेष चटर्जी व डॉ. इंद्राणी के अनुसार फिलिपिंस के अंतरराष्ट्रीय धान शोध केंद्र की निगरानी में वैज्ञानिकों का एक समूह सिंगुर प्रखण्ड के बिघाटी ग्राम पंचायत इलाके के राघवपुर में आमन धान की 20 नई प्रजाति पर शोध किया। शोध कार्य में वैज्ञानिकों के साथ सिंगुर के करीब 100 किसान परिवार की महिलाएं भी शामिल थीं। कृषि विभाग का दावा है कि बाढ़ के दिनों में 10 दिनों तक तथा 70 सेमी. पानी में डूबे रहने के बावजूद नई प्रजाति के आमन धान के पौधे को नुकसान नहीं पहुंचेगा। कृषि विभाग के सहयोग से हावड़ा जिले के उदयनारायणपुर, बर्दवान जिले के भातार और सिंगुर के किसान धान की नई प्रजाति की खेती करेंगे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कृषि सलाहकार प्रदीप मजूमदार ने बताया कि राज्य सरकार धान,प्याज,दाल और शाक-सब्जियों के क्षेत्र में स्वनिर्भर होना चाह रही है।
इनका कहना है-
पश्चिम बंगाल सरकार एक अभियान के तहत राज्य के किसानों को धान की विभिन्न प्रजाति के बीज मुफ्त तथा कृषि सरंजाम उपलब्ध करा रही है। इसकी शुरूआत पूर्व मिदनापुर जिले के नंदकुमार प्रखण्ड से की गई है।
- प्रो. आशीष बनर्जी, कृषि मंत्री, पश्चिम बंगाल सरकार।
Published on:
16 Dec 2018 06:30 pm
बड़ी खबरें
View Allकोलकाता
पश्चिम बंगाल
ट्रेंडिंग
