BENGAL GANGA GHAT 2023-कोलकाता महानगर के ज्यादातर गंगा घाट उपेक्षा के शिकार हो रहे हैं। कुछ घाटों की स्थिति यह है कि वहां थोड़ी देर बैठ पाना मुश्किल है। गंगा घाटों की जमीनी हकीकत यहां की स्वच्छता के प्रति लोगों की उदासीनता बयां कर रही है। अर्मेनियम फेरी घाट के निकट स्थित शील घाट पर स्थानीय व्यक्ति बंशी वर्मा ने बताया कि अभी जलस्तर कम हुआ है जिसके कारण चारों तरफ मिट्टी फैली है। हर समय यहां फिसल कर गिरने की आशंका बनी रहती है। छोटेलाल घाट पर स्नान करने आने वाले पण्डित गोवर्धन शास्त्री ने कहा कि यहां की दयनीय दशा के जिम्मेदार काफी हद तक यहां के निवासी भी है। मल, मूत्र सहित अन्य अपशिष्ट यहां फेंक दिए जाते हैं जिस कारण भारी दुर्गंध रहती है और लोगों का नहाना भी मुहाल हो जाता है। घाट पर पूजा पाठ करने वाले मधुसूदन बेरा ने बताया कि बीच बीच में स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा गंगा किनारे स्वच्छता अभियान चलाया जाता है लेकिन दूसरे ही दिन स्थिति जस की तस हो जाती है। हालांकि रोज सुबह यहां सफाई होती है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
—
इनका कहना है
जलशक्ति मंत्रालय की ओर से नमामि गंगे के तहत लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से टी शर्ट, टोपी सहित कई तरह की सामग्रियां उपलब्ध कराई जाती है। समय समय विभिन्न घाटों पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। किसी भी प्रकार की गंदगी गंगा में न बहाई जाए। इसके अलावा स्वच्छता अभियान भी चलाया जा रहा है। हर सम्भव प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन स्वच्छता के लिए लोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा तभी यह अभियान सफल हो पायेगा।#चंद्रशेखर बासोतिया प्रदेश सह संयोजक, गंगा विचार मंच