
WEST BENGAL-भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि: मुनि जिनेश
BENGAL GURU PURNIMA 2023-कोलकाता/हावड़ा। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। गुरु असत् से सत् की ओर, अंधकार से प्रकाश और मृत्यु से अमरत्व की ओर ले जाते हैं। गुरु पारसमणि, कल्पवृक्ष, चिंतामणि रत्न के समान होते है। मुनि जिनेश कुमार ने यह बात कही। मुनि जिनेश कुमार ठाणा -3 के सान्निध्य में 264वां तेरापंथ स्थापना दिवस हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। इससे पहले अनुशासन रैली का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर वर्षावास स्थापना अनुष्ठान, गुरु पूर्णिमा एवं सामूहिक तेला तप प्रत्याख्यान पंचरंगी तप प्रत्याख्यान हुए। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार ने कहा मारवाड़ की कंटकाकीर्ण धरती पर जन्म लेकर गुलाब की तरह सत्य की सौरभ फैलाने वाले फौलादी व्यक्तित्व के धनी थे आचार्य भिक्षु। उनकी धर्म क्रांति ही तेरापंथ के रूप में प्रसिद्ध हुई। आचार्य भिक्षु निर्भीक, साहसी, पुरुषार्थी, सत्य के पक्षधर व आचार वान थे। गुरु पूर्णिमा पर गुरु के महत्व को रेखांकित करते हुए मुनि जिनेश कुमार ने कहा गुरू पत्थर की नाव, कागज की नाव व लकड़ी की नाव के समान तीन प्रकार के होते हैं। जो गुरु लकड़ी की नौका के समान होते है वे ही कल्याणकारी होते है।
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साधना क्षेत्र में तप का बहुत बड़ा महत्व
जो अच्छा शिष्य रहा हुआ है वहीं अच्छा गुरु बन सकता है। साधना क्षेत्र में तप का बहुत बड़ा महत्त्व है। तप जीवन का संगीत है, अध्यात्म का नवनीत है। तप अतीत का क्षयोपशम व भविष्य का दर्पण है। इस अवसर पर मुनि परमानंद ने कहा- श्रद्धा, समर्पण, विनय के संतुलन का नाम है-तेरापंथ। अहंकार और ममकार के विसर्जन का नाम है तेरापंथ। गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति के जीवन की राह को आसान बना देता है। भारत वर्ष में गुरु का बहुत बड़ा महत्व है। बाल मुनि कुणाल कुमार सुमधुर गीत के द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया। स्वागत भाषण साउथ कोलकता जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष विनोद चौरडिय़ा व आभार ज्ञापन मंत्री कमल सेठिया ने किया।
Published on:
04 Jul 2023 05:27 pm
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