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Rohingya infiltration: फिर क्यों लुक-छिप कर भारत आने लगे रोहिंग्या मुसलमान

Myanmar से भाग कर Bangladesh के रास्ते पWest Bengal में घुसपैठ करने वाले Rohingya Muslims देश में सीएए और एनआरसी से डर कर यहां छिपने के बजाए भारत छोड़ दूसरे देशों में आशियाना तलाश रहे हैं। लेकिन बांग्लादेश के शिविरों में रह रहे रोहिंग्या फिर से भारत आना शुरू कर दिए हैं। फिर से रोहिंग्या बांग्लादेश से बंगाल में क्यों आ रहे हैं।

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Rohingya infiltration: फिर क्यों लुक-छिप कर भारत आने लगे रोहिंग्या मुसलमान

Rohingya infiltration: फिर क्यों लुक-छिप कर भारत आने लगे रोहिंग्या मुसलमान

फर्जी भारतीय दस्तावेजों के जरिए क्यों थाईलैंड, नेपाल, इंडोनेशिया व मध्य पूर्वी देशों में तलाश रहे हैं महफूज आशियाना

पिछले दिनों बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में हुई थी घुसपैठ, सीमा पार कराने और विदेश भेजने के लिए बंगाल व बांग्लादेश में सक्रिय हैं दलालों का सिंडिकेट

कोलकाता

म्यांमार से भाग कर बांग्लादेश के रास्ते पश्चिम बंगाल में घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या मुसलमान देश में सीएए और एनआरसी से डर कर यहां छिपने के बजाए भारत छोड़ दूसरे देशों में आशियाना तलाश रहे हैं। लेकिन बांग्लादेश के शिविरों में रह रहे रोहिंग्या फिर से भारत आना शुरू कर दिए हैं। फिर से रोहिंग्या बांग्लादेश से बंगाल में क्यों आ रहे हैं।

केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने बताया कि रोहिंग्या मुसलमानों को बंगाल से दूसरे देशों में भेजने के लिए यहां के कुछ दलाल सिंडिकेट सक्रिय हैं। खुफिया एजेंसियों ने इस बारे में गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी है, जिसमें कहा गया है कि कुछ दलाल बंगाल के विभिन्न जिलों में रह रहे रोहिंग्याओं के फर्जी आधार नंबर, पैन कार्ड और मतदाता पहचान-पत्र सहित अन्य फर्जी दस्तावेजों के साथ उनके पासपोर्ट भी बनवा रहे हैं। इन फर्जी भारतीय दस्तावेजों के आधार पर रोहिंग्या मुसलमान थाईलैंड, इंडोनेशिया, नेपाल और मध्य पूर्व के देशों में जा रहे हैं और नौकरी करते हुए वहां अपना महफूज आशियाना तलाश रहे हैं। खुफिया एजेंसियों के अनुसार नेपाल में कई जगहों पर कुछ रोहिंग्या बस गए हैं।

भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे बंगाल के सीमावर्ती इलाकों के दलाल 18 से 21 हजार रुपए में घुसपैठियों को आधार नंबर, मतदाता पहचान-पत्र और दूसरे फर्जी भारतीय दस्तावेज बनवा कर दे रहे हैं। दलालों ने रोहिंग्या मुसलमानों को बेंगलूरु और हैदराबाद जैसे शहरों में भेज कर उनकी नौकरी की भी व्यवस्था की है।
फिर बंगाल में आने लगे रोहिंग्या

बंगाल के रास्ते दूसरे देशों में महफूज ठिकाना मिलने की खबर के बाद बांग्लादेश के चटग्राम स्थित शिविर से छोटी-छोटी टुकडिय़ों में रोहिंग्या मुसलमानों का फिर से बंगाल आना शुरू हो गया है। केंद्रीय खुफिया एजेंसी के अनुसार कुछ दिन पहले बांग्लादेश की सीमा पार कर 30 रोहिंग्याओं के एक दल ने उत्तर 24 परगना जिले के घोजाडांगा सीमावर्ती इलाके में घुसपैठ की है। इससे पहले भी छोटे-छोटे समूहों में रोहिंग्याओं ने बांग्लादेश से उत्तर 24 परगना जिले के विभिन्न जगहों में घुसपैठ की है। इसके पीछे बांग्लादेश और बंगाल के दलालों का सिंडिकेट सक्रिय है।
ऐसे काम करता है दलाल सिंडिकेट

बांग्लादेश के दलालों का सिंडिकेट मोटी रकम लेकर रोहिंग्या मुसलमानों को सीमा पार करवाकर उन्हें बंगाल के दलालों के सिंडिकेट को सौंप देते हैं। यहां के दलाल रोहिंग्याओं का आधार नंबर, मतदाता पहचान-पत्र और पैन कार्ड सहित दूसरे फर्जी दस्तावेज बनवाते हैं। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दलाल उनके विदेश भेजने के लिए पासपोर्ट तैयार करते हैं।
पहले जम्मू, दिल्ली और मुंबई जाते थे रोहिंग्या

केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार बांग्लादेश के रास्ते बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के विभिन्न जगहों में घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या पहले छिपने के लिए जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, हैदराबाद और मुंबई जैसे शहरों में रहते थे, जिन्हें आतंकी संगठन अपनी आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल करते थे। लेकिन सीएए लागू के होने के बाद भारत के किसी भी शहर में उन्हें फर्जी दस्तावेज के आधार पर रहना खतरे से खाली नहीं लग रहा है।
दलालों के सिंडिकेट पर निगरानी तेज

राज्य पुलिस की मदद से केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने रोहिंग्या मुसलमानों के फर्जी दस्तावेज बनाने वाले दलालों पर निगरानी शुरू कर दी है। इस बीच कोलकाता पुलिस के खुफिया विभाग ने कोलकाता के सियालदह और उत्तर 24 परगना जिले के विभिन्न इलाकों से दलालों के गिरोह को पकड़ा है। इनमें से अधिकतर सियालदह से गिरफ्तार किए गए हैं। हालांकि इस बारे में कोलकाता पुलिस के आला अधिकारी अधिकारिक तौर से मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं हैं।