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रेलवे कालोनी की मानव रहित रेलवे क्रासिंग की जर्जर सड़क पर तालाब जैसा नजारा, आने-जाने वाले मुसीबत में

यात्री, रेलवे कर्मचारी व स्कूली छात्र-छात्राएं करते है आवागमन

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कोरबा

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Shiv Singh

Sep 03, 2018

यात्री, रेलवे कर्मचारी व स्कूली छात्र-छात्राएं करते है आवागमन

यात्री, रेलवे कर्मचारी व स्कूली छात्र-छात्राएं करते है आवागमन

कोरबा. मानव रहित रेलवे क्रासिंग के जर्जर सड़क पर करीब एक फीट तक लबालब पानी का भराव है। लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। बड़ी दुर्घटना की संभावना बनी हुई है।

रेलवे कॉलोनी में मानव रहित रेलवे क्रासिंग स्थापित है। इस क्रासिंग की सड़क जर्जर हो गई है। फाटक के समीप बारिश का पानी लबालब भरा हुआ है। पानी निकासी का कोई साधन नहीं है। जर्जर सड़क से वाहन पार करते समय चालक अनियंत्रित हो रहे हैं। लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


फाटक कोरबा रेलवे स्टेशन से लगी हुई है। हर 10 से 15 मिनट के भीतर टे्रनों का परिचालन होता है। इसलिए प्रशासन ने फाटक को बंद कर दिया है। दोपहिया वाहन व साइकिल सवार को कोई फाटक के साईड से, तो कोई वाहन झुकाकर पार करता है। लोग अपना कुछ समय बचाने के लिए जान जोखिम में डाल रहे हैं।

रेलवे फाटक को पार कर रेलवे कर्मचारी, शारदा बिहार, एसईसीएल कालोनी, मुड़ापार सहित अन्य क्षेत्रों के लोग आवागमन करते हैं, इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग सड़क के दूरूस्तीकरण पर ध्यान नहीं दे रहा है और न ही पानी निकासी के लिए कोई पहल कर रहा है। जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है। लोग घायल हो रहे हैं। वहीं बड़ी दुर्घटना की संभावना बनी हुई है।

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पांच किमी का घुमावदार रास्ता
मानव रहित रेलवे फाटक से आधा किलोमीटर के भीतर रेलवे कालोनी, मुड़ापार, एसईसीएल, शारदा विहार सहित अन्य क्षेत्र आता है। यात्री फाटक पार करके आवागमन करना उचित समझते हैं। अन्यथा उन्हें नहर मार्ग होते हुए सुनालिया पुल से चार से पांच किलोमीटर की लंबी दूरी तय करना पड़ता है।


स्कूली बच्चे भी करते है आवागमन
इस मार्ग से स्कूली बच्चे सायकल से आवागमन करते हैं। कई बार जर्जर सड़क में सायकल अनियंत्रित होने पर गिर जाते हैं। वहीं गंदा पानी के भराव के कारण उन्हें पैदल चलना पड़ता है। छात्र-छात्राओं के डे्रस भीग जाते हैं।