
पाली के 1100 साल पुराने शिव मंदिर के तालाब निकल रहा प्राचीन खजाना, कीमत जान हो जाएंगे हैरान
आकाश श्रीवास्तव@कोरबा. करीब 1100 साल पहले 9वीं शताब्दी में विक्रमादित्य द्वारा बनाए गए प्राचीन शिव मंदिर से लगे तालाब और आसपास की जगहों से लगातार अवशेष मिल रहे हैं। अब तक 100 से अधिक अवशेष मिल चुके हैं। मंदिर के गर्भगृह में तीन-तीन शिवलिंग है।
जबकि शिवमंदिर के स्थापत्यकला के अनुसार गर्भगृह में सिर्फ एक ही शिवलिंग होना चाहिए। ऐसे में विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि प्राचीनतम काल में युद्ध के समय दो मंदिर नष्ट हो गए होंगे। जिसकी वजह से शिवलिंग को एक ही मंदिर के गर्भगृह में रखा गया है।
कोरबा के पाली के राजा विक्रमादित्य की पूजा स्थल थी। राजा विक्रमादित्य जो बन्ना राजवंश शासक थे। उन्होंने बड़े तालाब के किनारे शिव मंदिर की स्थापना की थी। इस मंदिर पर खुदी हुई मूर्तियों का आर्किटेक्चर अबु पहाड़ियों के जय मंदिरों, सोहगपुर और यह खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध मंदिर जैसा भी है।
विक्रमादित्य को महामंडलेश्वेर मालदेव के पुत्र जयमेयू के नाम से भी जाना जाता है। इसे लगभग 870 ईस्वी में बनाना शुरू किया गया था। करीब 30 साल 900 ईस्वी में इसका काम पूरा हुआ था।
मंदिर के हर एक पत्थर खास
पाली मंदिर आस्था के लिहाज से जितना महत्वपूर्ण है उतना ही पुरातत्व के लिहाज से जिज्ञासा का केन्द्र भी है। मंदिर के हर एक पत्थर अपनी एक अलग कहानी बयां कर रहे हैं। मंदिर के अष्टकोणीय मण्डप पर ब्रम्ह्मा, श्रीकृष्ण, माता सरस्वती, महिषासुर मर्दिनी एवं गजलक्ष्मी का अंकन किया गया है।
मंदिर के जंघा भाग में एक वलयाकृति के द्वारा पाद भाग से विभक्त है। जंघा पर आठ भुजाओं वाले नृत्यरत भगवान शिव, चामुण्डा, सूर्य, त्रिपुरान्तकशिव एवं कार्तिकेय के अलावा एक वानर द्वारा स्त्री के गीले वस्त्र खींचना, स्त्री द्वारा मांग में सिंदूर भरना एवं दर्पण सुंदरी का अंकन मंदिर की विशेषता है।
Updated on:
19 Jul 2023 02:10 pm
Published on:
19 Jul 2023 02:08 pm
बड़ी खबरें
View Allकोरबा
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
