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एक ही जमीन को दो लोगों ने अपना बताकर नौकरी के लिए दिया आवेदन, फर्जी भूविस्थापित पर केस दर्ज

- एसईसीएल के दीपका खदान का मामला, पिता का नाम एक जैसे होने पर उठाया फायदा - प्रबंधन की जांच में हुआ खुलासा

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कोरबा

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Shiv Singh

Apr 10, 2018

एक ही जमीन को दो लोगों ने अपना बताकर नौकरी के लिए दिया आवेदन, फर्जी भूविस्थापित पर केस दर्ज

Job cheating of villagers

कोरबा . एसईसीएल के अफसर उस समय हक्के-बक्के रह गए। जब एक ही जमीन के ऐवज में दो लोगों ने प्रबंधन से नौकरी की मांग रखी। जिस शख्स ने पहले फार्म जमा किया वह फर्जी निकला। दरअसल दोनों के पिता का नाम एक ही होने का फायदा उठाने की कोशिश की। प्रबंधन ने इसकी सूचना पुलिस को दी, पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

एसईसीएल दीपका में भूविस्थापितों को नौकरी देने के लिए प्र्रक्रिया चल रही है। जिस शख्स को जमीन के ऐवज में नौकरी मिलनी है उसका संदीप कंवर पिता ओकांर सिंह है। संदीप से पहले जांजगीर-चांपा के सुआमुड़ी गांव के गोपाल सिंह राठौर ने दीपका प्रबंधन को नौकरी के लिए आवेदन दिया। गोपाल सिंह राठौर के पिता का भी नाम ओंकार सिंह है।

फर्जी दस्तावेज तैयार कर गोपाल सिंह राठौर ने प्रक्रिया पूरी कर ली थी। दरअसल एसईसीएल द्वारा जमीन मालिक के नाम पर प्रक्रिया की जाती है। एक ही पिता का नाम होने की वजह से किसी को शक भी नहीं हुआ। इसी बीच मूल भूविस्थापित संदीप कंवर ने नौकरी के लिए आवेदन दिया। जब अफसरों ने संदीप का फार्म देखा। तो हक्के-बक्के रह गए।

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दरअसल एक ही जमीन के लिए दो-दो लोगों ने फार्म जमा कर दिया था। प्रबंधन ने भी फर्जी भूविस्थापित गोपाल सिंह राठौर को बिना जानकारी दिए जांच कराई। इसमें स्पष्ट हुआ कि गोपाल सिंह राठौर ने फर्जी तरीके से आवेदन किया है। जबकि संदीप मूल भूविस्थापित है। प्रबंधन ने मामला दीपका पुलिस को सौंप दिया। दीपका पुलिस ने गोपाल सिंह राठौर के खिलाफ 420, 467, 468, 471 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

बड़ा सवाल गोपनीय जानकारी आखिर बाहरी लोगों के पास पहुंच कैसे ?
इस मामले के खुलासे के बाद अब सवाल उठने लगा है कि भूविस्थातिपों की गोपनीय जानकारी आखिर बाहर कैसे आ रही है। बताया जा रहा है कि एक गिरोह इस काम में लगा हुआ है जो कि इस तरह एक जैसे नाम,पते या फिर जमीन के रिकार्ड के आधार पर फर्जी भूविस्थापितों को नौकरी दिलाया जा रहा है। इस मामले में सिर्फ पिता का नाम ही एक जैसा था। लेकिन जमीन, गांव का नाम, भूविस्थापित के बेटे का नाम अलग होने के बाद भी गिरोह ने पूरा दस्तावेज तैयार करवा लिया। हालांकि अब पुलिस जांच में इस मामले का खुलासा हो सकेगा। इससे पहले भी कई इस तरह के मामले सामने आ चुके हैें।