
छात्रों की संख्या का भौतिक सत्यापन
कोरबा. आरटीई की सीटों में घालमेल के खुलासे के बाद अब डीईओ सभी नोडल अफसरों को निजी स्कूलों में सीटों की जांच करने का आदेश देने जा रहे हैं। जिसके बाद जिले के सभी नोडल निजी स्कूल के कार्यालय जाकर रजिस्टर के अनुसार छात्रों की संख्या का भौतिक सत्यापन करेंगे।
पत्रिका द्वारा शहर के बड़े बैनर के रिहायशी स्कूलों द्वारा आरटीई की सीटें छुपाए जाने का खुलासा किया था। जिसे जिला शिक्षा अधिकारी ने संज्ञान में ले लिया है। अब जिले के सभी 49 अफसरों को स्कूल-स्कूल जाकर सीटों के वास्तविक संख्या की जांच करने का फरमान जारी किया जाएगा।
जिसके बाद निजी स्कूलों की जांच शुरू होगी। उल्लेखनीय है कि जिले के बड़े स्कूल ऐसा नहीं चाहते कि आरटीई कोटे से एडमिशन लेकर किसी गरीब परिवार का बच्चा उनके स्कूल में पढ़े। वह गरीब बच्चों के अधिकारों में कटौती करने का पूरा प्रयास करते हैं।
बड़े बैनर के निजी स्कूलों में प्राथमिक कक्षा की औसतन सालाना फीस 30 से 40 तक होती है। जबकि सरकार द्वारा आरटीई कोटे से प्रवेशित बच्चों के एवज में स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि के तौर पर 7 से 8 हजार रूपए ही मिलते हैं।
पहले की होती जांच तो नहीं आती ऐसी नौबत
जिले के निजी स्कूलों में आरटीई से प्रवेश दिलवाने के लिए 49 नोडल अफसर हैं। इन्होंने अपने काम में भारी लापरवाही बरती है। जब निजी स्कूलों द्वारा अपने स्कूल में आरटीई कोटे की उपलब्ध सीटों की जानकारी उपलब्ध करवाई तभी सीटों के संख्या की तस्दीक कर ली होती तो अब जांच करने की नौबत नहीं आती।
अब जब प्रवेश देने के लिए आवेदन करने की तारीख समाप्त हो चुकी है। तब जांच का कितना फायदा होता है। इस पर असमंजस बरकरार है।
-निजी स्कूलों द्वारा सीटों की जो जानकारी विभाग को दी गई है। उसकी वास्तविकता क्या है? इसकी जांच के लिए सभी नोडल अफसरों को आदेश जारी किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही होगी।
-डीके कौशिक, डीईओ, कोरबा
Published on:
30 Jun 2018 11:21 am
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