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Live Report : सफाईकर्मियों की मांगों पर चल रही थी चर्चा, हंगामा हुआ तो मीटिंग बीच में छोड़ चलते बने आयुक्त

धरने पर बैठी डोर टू डोर कचरा उठाने वाली महिलाओं और आयुक्त के बीच वार्ता

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कोरबा

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Shiv Singh

May 04, 2018

धरने पर बैठी डोर टू डोर कचरा उठाने वाली महिलाओं और आयुक्त के बीच वार्ता

धरने पर बैठी डोर टू डोर कचरा उठाने वाली महिलाओं और आयुक्त के बीच वार्ता

कोरबा .काम बंद कर धरने पर बैठी डोर टू डोर कचरा उठाने वाली महिलाओं और नगर निगम आयुक्त के बीच गुरुवार को वार्ता हुई। आयुक्त ने एक-एक मांग पर चर्चा कर अधिकारियों को उस पर काम करने तत्काल निर्देश दिया। यहां तक कि दर में 600 रूपए की बढ़ोतरी की घोषणा भी कर दी। लेकिन इसी बीच कुछ महिलाएं कलेक्टर दर पर हर महीने 10 हजार रूपए की मांग पर अड़ गई। हंगामा होते देख आयुक्त वार्ता से उठकर चले गए। इधर महिलाएं नारेबाजी करती रही।


गुरुवार को सुबह साढ़े 11 बजे निगम कार्यालय साकेत के प्रवेश द्वार पर निगम आयुक्त रणबीर शर्मा, ईई ग्यास अहमद, स्वास्थ्य अधिकारी वीके सारस्वत, संजय तिवारी, पार्षद अमरनाथ अग्रवाल की उपस्थिति में सभी महिलाओं के साथ चर्चा शुरू हुई। पहले पार्षद अमरनाथ अग्रवाल ने महिलाओं की समस्या आयुक्त के सामने रखी। कुछ महिलाओं ने भी व्यक्तिगत रूप से बात रखी।


आयुक्त ने हर मांग पर की चर्चा की
सबसे पहले आयुक्त ने महिलाओं को स्पष्ट कर दिया कि वे ना तो निगम के कर्मचारी है। ना ही दैनिक वेतन भोगी ना ही ठेकाकर्मी। मिशन क्लीन सिटी के तहत सहायता समूह के माध्यम से इस कार्य में जुड़ी हैं। शासन ने शुरूआती तीन महीने हर महिला को पांच हजार रुपए वेतन तय किया था। लिहाजा वो राशि दी गई। इसके बाद शासन के मुताबिक 5 हजार में से 2300 रूपए निगम उनको वेतन देगा। उसके बाद जितनी भी वसूली होगी उसमें पूरा हक महिलाओं का रहेगा। वहीं जो भी कबाड़ बेचा जाएगा वह भी महिलाओं का होगा। अगर वसूली अच्छी तरह से हो तो उनका वेतन 10 हजार भी पहुंच सकता है।


महिलाओं की मांग थी कि शुरूआत में उनको बताया गया था कि उनका और परिवार का हर दो माह में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कैंप लगाया जाएगा। इस पर आयुक्त ने अधिकारियों से जानकारी ली जिस पर अब तक एक बार भी कैंप नहीं लगाना सामने आया। आयुक्त ने नियमित तौर पर स्वास्थ्य परीक्षण का आश्वासन दिया गया।


महिलाओं की एक बड़ी परेशानी थी कि सुपरवाइजर द्वारा दुव्र्यहार किया जाता है। इस पर आयुक्त ने इंस्पेक्टर संजय तिवारी से सभी 14 सुपरवाइजर को तीन दिन की मोहलत देने को कहा।


10 फीसदी ने कर दिया हंगामा
आयुक्त से चर्चा के दौरान 90 फीसदी महिलाओं ने फैसले को लेकर ताली बजाकर स्वागत किया। लेकिन दो महिलाएं बीच में खड़ी होकर हंगामा करने लगीं। 10 फीसदी महिलाओं की वजह से वार्ता हंगामे की भेंट चढ़ गई। जिससे वार्ता विफल हो गई। बाद मेें महिलाओं ने मुख्य द्वार को बंद करने की भी कोशिश की। लेकिन पुलिस ने इसे नाकाम कर दिया।


कई वार्डों में पार्षदों ने ही बंद करवा रखा है यूजर चार्ज
महिलाओं ने बताया कि कई वार्ड मेेंं लोग स्पष्ट कह चुके हैं कि यूजर चार्ज नहीं दिया जाएगा। ऐसे मेेंं पैसा लेने जाने पर उनके साथ दुव्र्यव्यहार किया जाता है और वसूली नहीं होगी तो उनको भी पैसा नहीं मिलेगा। दरअसल पुराने शहर में दो वार्ड सहित रविशंकर नगर के अलावा कुछ जगहों पर लोग समेकित कर और युजर चार्ज दोनेां नहीं देना चाहते। इसे लेकर विवाद है।