
टॉफिक ऑफ डे में शामिल हुए अधिवक्ता गजेन्द्र सिंह
कोरबा . अगर आप शहर के आसपास जमीन खरीदना चाहते हैं तो दलालों पर भरोसा न करें। पहले जमीन की खुद पतासाजी करें। इसमें कोटवार या गांव के पटेल से मदद लें। पटवारी से सम्पर्क कर जमीन की सही स्थिति जान लें।
यह कहना है राजस्व मामले के अधिवक्ता गजेन्द्र श्रीवास्तव का। श्रीवास्तव शनिवार को पत्रिका डॉट कॉम की ओर से आयोजित टॉपिक ऑफ डे में शामिल हुए। उन्होंने राजस्व मामले पर बातचीत की। बताया कि शहर से लगे गांव रामपुर, नकटीखार, दादरखुर्द और बरबसपुर गांव में जमीन से संबंधित सबसे अधिक विवाद हंै।
इसका बड़ा करण है कि पहले ये अन सर्वेड गांव थे। इनका नक्शा खसरा राजस्व विभाग के पास नहीं था। जो व्यक्ति जहां काबिज होता था, वहीं उसकी जमीन मान ली जाती थी। इसी अधार पर राजस्व विभाग ने सर्वे करके नक्शा खसरा तैयार किया। इस सर्वे में बड़ी गड़बड़ी हुई। जमीन की लेखा जोखा रखने वाले भू- अभिलेख विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर सही छानबीन नहीं की। गांव में रहने वाले लोगों को सर्वे की जानकारी नहीं हुई।
जमीन दलालों ने राजस्व विभाग से सेटिंग कर लिया। नक्शा पर नंबर चढ़वाकर अपना दावा पेश किया। सही छानबीन नहीं होने से जमीन पर काबिज कई लोग वंचित हो गए। उन्होंने धारा 89 के तहत एसडीओ कोर्ट में केस किया। कई मामले में आज तक कोर्ट का निर्णय नहीं हुआ है। इससे लोग परेशान हैं।
पॉवर ऑफ अटॉर्नी भरोसेमंद नहीं
उन्होंने बताया कि आजकल दलाल पॉवर ऑफ अटार्नी लेकर जमीन खरीदी बिक्री का कार्य करते हैं। अगर कोई व्यक्ति पॉवर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन खरीदता है तो खरीदने से पहले अटॉर्नी की जांच कर ले। जमीन के वास्तिविक मालिक से सम्पर्क कर यह पता लगाए कि जमीन खरीदने पर कोई नुकसान या विवाद तो नहीं होगा।
फर्जी रजिस्ट्री करने वाला गिरोह भी
उन्होंने बताया कि आजकल कटघोरा, पोड़ी और कोरबा डिविजन में जमीन की रजिस्ट्री करने वाला फर्जी गिरोह भी सक्रिए है। गिरोह जाली दस्तावेज तैयार करके दूसरे व्यक्ति को रजिस्ट्रार के समक्ष खड़ा कर देते है और जमीन बेच देते हैं। इसलिए जरूरी है कि जमीन खरीदने वाला सौदा करने से पहले जमीन की अच्छी तरह छानबीन कर ले।
Published on:
17 Mar 2018 04:37 pm
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