
मार्ग की जर्जर हालत को लेकर विधायक की आर्थिक नाकेबंदी, कोयला परिवहन छह घंटे तक रही बाधित
कोरबा. विधायक जयसिंह अग्रवाल के चांपा-कोरबा-कटघोरा-बिलासपुर मार्ग की जर्जर हालत को लेकर किए गए आर्थिक नाकेबंदी में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं समेत सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हुई। दर्री बरॉज और गौमाता चौक पर किए गए नाकेबंदी से कोयला लोड वाहनों के पहिए छह घंटे तक थमे रहे। वाहनों की कतार कई घंटे तक लगी रही। इस जर्जर मार्ग को लेकर कांग्रेस द्वारा शासन व प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया गया।
सुबह से सैकड़ों लोगों की भीड़ दोनों जगहों पर पहुंची। गौमाता चौक पर शहर कांग्रेस तो वहीं दर्री बरॉज के पास ग्रामीण कांग्रेस द्वारा हल्लाबोल किया गया। इमलीडुग्गु बाइपास से उरगा की ओर जाने वाले वाहनों की नाकेबंदी की गई। हालांकि इस मार्ग पर कोयला लोड वाहनों पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा।
अधिकांश वाहन रिंग रोड से बरबसपुर की ओर से रवाना हो गए थे, लेकिन दर्री बरॉज में किए गए आर्थिक नाकेबंदी का असर व्यापक असर देखने को मिला। बालको के रास्ते रिस्दी-बरबसपुर की ओर जुडऩे वाली इस बरॉज के पास दोनों तरफ वाहनों के पहिए थमे रहे। दर्री से लेकर गोपालपुर और छुरी और कटघोरा तक कोयला लोड वाहनों की कतार लगी रही।
दूसरी तरफ सीएसईबी चौक से दर्री तक भी वाहन खड़े रहे। बालको रिंग रोड मेें भी सैकड़ों वाहन खड़े रहे। लगभग ६ घंटे की आर्थिक नाकेबंदी से भारी वाहनों के पहिए पूरी तरह से थमे रहे। दोनों प्रदर्शन स्थल पर विधायक जयसिंह अग्रवाल ने कार्यकर्ताओं व आम लोगों को सम्बोधित किया।
विधायक ने कहा कि बीओटी अवधि खत्म होने के बाद इस सड़़क को एनएच को हैंडओवर कर दिया गया। एनएच को सड़क हैंडओवर के बाद पीडब्लूडी ने इस सड़क से हाथ खींच लिया। अब इस सड़क पर काम शुरू होने में एक साल का समय लग जाएगा। तब तक इसकी मरम्मत कौन कराएगा। इसकी मांग उनके द्वारा कलेक्टर से लेकर सीएम से भी कर चुके हैं। लेकिन मरम्मत की सुध किसी ने अब तक नहीं ली है। नाकेबंदी के दौरान शहर कांग्रेस अध्यक्ष राजकिशोर प्रसाद, ग्रामीण अध्यक्ष उषा तिवारी, विकास सिंह, शेख इस्तियाक, सुरेन्द्र प्रताप जायसवाल, सभापति धुरपाल सिंह कंवर, पूर्व सभापति संतोष राठौर, महेश अग्रवाल, दिनेश सोनी, मुकेश राठौर समेत अधिक संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।
कोयला परिवहन पर पड़ा असर, सैकड़ों वाहनों शाम को हो सकी रवाना
आर्थिक नाकेबंदी की वजह से कोयला परिवहन पर सबसे अधिक असर पड़ा। सैकड़ों वाहन पांच बजे के बाद ही रवाना हो सकी। अधिकांश ट्रांसपोर्टरों ने भी अप्रत्यक्ष रूप से इस नाकेबंदी का समर्थन किया। बदहाल सड़क की वजह से हो रही परेशानी से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय भी बाधित हो रहा है। हालांकि कई कंपनियों को जाने वाला कोयला काफी देर से रवाना हो सका। नाकेबंदी में सवारी गाडिय़ों व छोटे वाहनों को नहीं रोका गया।
Published on:
09 Sept 2018 09:08 pm
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