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खेत में काटकर रखे फसल को सुबह लेने पहुंचे किसान तो उड़ गए होश, अब हाथियों के खौफ से किसान कर रहे ये काम

Elephant Attack: इन दिनों इस गांव में हाथियों ने डेरा डाल रखा है। खेत पर रखे हुए कटे फसल को हाथी चट कर रहे हैं, वहीं किसान अब हाथियों के खौफ से आधे पके धान को भी घर ले जा रहे हैं।

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खेत में काटकर रखे फसल को सुबह लेने पहुंचे किसान तो उड़ गए होश, अब हाथियों के खौफ से किसान कर रहे ये काम

खेत में काटकर रखे फसल को सुबह लेने पहुंचे किसान तो उड़ गए होश, अब हाथियों के खौफ से किसान कर रहे ये काम

कोरबा. बालकोनगर से लगा ग्राम सोनपुरी। यहां के किसान कमल सिंह के पास तीन एकड़ खेतीहर जमीन है। किसान ने जमीन पर धान की फसल लगाई थी। फसल पककर तैयार होने पर कमल ने परिवार के साथ मिलकर शुक्रवार को फसल को काटकर खेत में रख दिया था। शनिवार को फसल बांधकर घर ले जाना चाहता था। सुबह जब खेत में पहुंचा तो उसके होश उड़ गए। खेत में काटकर छोड़ी गई फसल को हाथियों ने चट कर दिया था। जो फसल बची थी उसे पैरों से रौंद दिया था।

खेत में फसल की बर्बादी को देखकर किसान कमल सिंह परेशान हो गया। उन्होंने बताया कि तीन एकड़ जमीन पर धान की फसल लगाई गई थी। डेढ़ एकड़ की फसल हाथियों ने चट कर दिया है, जो थोड़ी फसल खेत में बची थी उसे पैरों से दबाकर छोड़ दिया। किसान अपने परिवार के साथ खेत में बिखरी पड़ी धान की बालियों को सहेज रहा था। इस उम्मीद के साथ कि जो फसल बची है वह घर पहुंच जाए।

कमल सिंह जैसे 15 से 20 किसान हैं जिनकी धान की फसल को हाथियों ने चट कर दिया है। सोनपुरी, अजगरबहार और जामबहार क्षेत्र में हाथियों का एक झुंड विचरण कर रहा है। इसमें 20 से 25 हाथ शामिल हैं। हाथियों के आने से ग्रमीण अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। हाथियों से धान की फसल को बचा पाना भी उनके लिए सिरदर्द बन गया है।

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वन विभाग ने गांव में नहीं कराई मुनादी
बालको नगर रेंज में हाथियों का झुंड कई दिन से डेरा जमाए हुए है। झुंड जामबहार, अजगरबहार और सोनपुरी क्षेत्र में विचरण कर रहा है। खेत में खड़ी धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की ओर से इस बार सोनपुरी के कुछ पारा-टोले में मुनादी भी नहीं कराई गई है।

अधपके फसल की कटाई
हाथियों से परेशान किसान अपनी फसलों को काटने में लगे हुए हैं। किसान कमल सिंह ने बताया कि फसल अभी पूरी तरह पककर तैयार नहीं हुई है, बावजूद इसके गांव के लोग फसल की कटाई में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि हाथियों का झुंड खेत में खड़ी फसल को चट कर जा रहा है। फसल को काटना अब उनकी मजबूरी बन गई है।

रतजगा करने को मजबूर
खलिहानों में रखे धान की फसलों और जान-माल की रक्षा को लेकर ग्रामीण रतजगा करने को मजबूर हैं। गांव के भीतर हाथी प्रवेश न कर सके, इसके लिए रात में गांव के अंतिम छोर व सड़क पर आग जलाकर रात भर जाग रहे हैं।

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वन विभाग भी परेशान
हाथियों से ग्रामीणों की सुरक्षा और फसल नुकसान को बचाने के लिए वन विभाग की ओर से किए गए सारे प्रयास असफल रहे हैं। हाथियों का झुंड धरमजयगढ़ वनमंडल के रास्ते कोरबा वनमंडल में आता है। आठ-दस दिन रूकने के पश्चात् धरमजयगढ़ वनमंडल में चला जाता है। हाथियों ने कुदमुरा और करतला वन परिक्षेत्र को रहवासी क्षेत्र भी बना लिया है। साल भर यहां हाथी अपना डेरा जमाए रहते हैं।

जिले में लगभग 90 हाथी अलग-अलग झुंड में कर रहे विचरण
कोरबा व कटघोरा वनमंडल में विभिन्न वन परिक्षेत्रों में लगभग 90 हाथी विचरण कर रहे हैं। ये हाथी कुदमुरा, करतला, बालकोनगर रेंज के अलावा कटघोरा वनमंडल के केंदई रेंज में डेरा जमाए हुए हैं। हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों के ग्रामीण जान-माल की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।