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20 एकड़ खेतिहर जमीन के फर्जी दस्तावेज देकर इस शख्स ने ठग लिए एक करोड़ 66 लाख, किस तरह दंपति को लिया झांसे मे, पढि़ए खबर…

- दंपति ने बुड़बुड पहुंच कर जमीन की पतासाजी की तो उसके होश उड़ गए।

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कोरबा

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Shiv Singh

Jun 26, 2018

20 एकड़ खेतिहर जमीन के फर्जी दस्तावेज देकर इस शख्स ने ठग लिए एक करोड़ 66 लाख, किस तरह दंपति को लिया झांसे मे, पढि़ए खबर...

20 एकड़ खेतिहर जमीन के फर्जी दस्तावेज देकर इस शख्स ने ठग लिए एक करोड़ 66 लाख, किस तरह दंपति को लिया झांसे मे, पढि़ए खबर...

कोरबा. आईबीपी से सेवानिवृत्त अफसर और उसकी पत्नी को सरायपाली बुड़बुड़ में लगभग 20 एकड़ खेतिहर जमीन का जाली दस्तावेज देकर शंकर रजक और उसके गिरोह ने एक करोड़ 66 लाख रुपए ठग लिया। दंपति ने बुड़बुड पहुंच कर जमीन की पतासाजी की तो उसके होश उड़ गए। दंपति की रिपोर्ट पर शंकर रजक, उसके दो पुत्र सहित चार लोगों के खिलाफ जाली दस्तावेज से धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।

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पुलिस ने बताया बांकीमोंगरा में रहने वाले एलेक्सियूस कुजूर गोपालपुर स्थित आईबीपी से सेवानिवृत्त हुए हैं। पत्नी शांति बाई के साथ बांकीमोंगरा में रहते हैं। शांति बाई सरकारी मिडिल स्कूल में शिक्षिका हैं। चार साल पहले कुजूर दंपति की मुलाकात कटघोरा के हुंकरा में रहने वाले शंकर लाल रजक से हुई।

शंकर ने कुजूर दंपति को बताया कि विकासखंड पाली ग्राम सरायपाली व बुड़बुड़ में एसईसीएल की कोयला खदान खुलने वाली है। यहां जमीन खरीदने पर अच्छा लाभ हो सकता है। जमीन एसईसीएल में अधिग्र्रहीत होने पर मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी मिलेगी। कुजूर दंपति शंकर के झांसे में आ गए।

उन्होंने जमीन खरीदने की इच्छा व्यक्त किया। दंपति ने शंकर को जमीन खोजने के लिए कहा। इसके कुछ दिन बाद शंकर नौ लोगों को लेकर दंपति के घर पहुंचा। सभी का परिचय कुजूर दंपति से कराया। यह भी बताया कि सभी अपनी जमीन बेचना चाहते हैं। दंपति जमीन खरीदने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद शंकर अपने सहयोगी सिद्धार्थ मंहत के साथ कुजूर दंपति के घर गया। नौ लोगों के लगभग २० एकड़ जमीन का नक्शा खसरा और पट्टा दिखाया। इस पर हल्का पटवारी, राजस्व निरीक्षक और तहसीलदार का हस्ताक्षर था।

दस्तावेज को देखकर कुजूर दंपति को शंकर पर भरोसा हो गया। उन्होंने २०१४-१५ के बीच शंकरलाल रजक, उसके पुत्र रवि रजक और अजय रजक के अलावा सिद्धार्थ महंत को किस्तों में एक करोड़ ६६ लाख रुपए दिया। इसमें एक करोड़ तीन लाख रुपए एलेक्सियूस कुजूर ने अपने खाते से शंकर और उसके पुत्रों को दिया। उसकी पत्नी शांति बाई ने अपने नाम से जमीन रजिस्ट्री कराने के लिए श्ंाकर लाल रजक को ६३ लाख रुपए बैंक खाते से निकाल कर दिया। बदले में शंकरलाल ने सरायपाली बुड़बुड़ में स्थित लगभग 20 एकड़ जमीन का दस्तावेज कुजुर दपंति को सौंपा। इसमें जमीन की ऋण पुस्तिका, नक्शा, खसरा शामिल था। दंपति को भरोसा हो गया है कि उसकी जमीन सरायपाली बुड़बुड़ में है।

शंकर ने कहा रजिस्ट्री हो गई पर नहीं दिया दस्तावेज
शंकरलाल रजक ने जमीन की रजिस्ट्री पेपर को छोड़कर अन्य दस्तावेज कुजूर दंपति को सौंप दिया। दपंति को बताया कि जमीन की रजिस्ट्री हो गई है। कटघोरा स्थिति रजिस्टार के दफ्तर से पेपर मिल जाएगा। वहां पेपर जमा है।

चौथी एफआईआर
शंकरलाल रजक के खिलाफ धोखाधड़ी की यह चौथा एफआईआर है। इसके पहले शंकर के खिलाफ कवर्धा, कोरबा के दीपका और कटघोरा थाना में केस दर्ज किया गया है। शातिर ठग श्ंाकरलाल रजक जिला पंचायत सदस्य रोहिणी रजक का पति है।

कवर्धा में गिरफ्तारी के बाद दंपति खोजने लगे जमीन
दंपति को शंकरलाल की बातों पर इतना भरोसा था कि २० एकड़ जमीन का सौदा करने से पहले सरायपाली बुड़बुड़ जाकर भूखंड को नहीं देखा। इस बीच शंकरलाल को कवर्धा पुलिस ने सरायपाली बुड़बुड़ में जमीन खरीदी का झांसा देकर ठगी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। शंकरलाल के गिरफ्तारी की खबर अखबार में प्रकाशित हुई। इसके बाद कुजूर दंपति का माथा ठनका। दंपति ने सरायपाली बुड़बुड़ पहुंचकर अपनी जमीन की तलाश शुरू की। गांव में जमीन नहीं मिली। गांव के पटवारी और पाली तहसील कार्यालय मेंं सम्पर्क किया। वहां बताया गया है कि कुजूर दंपति के पास जो दस्तावेज हैं, वह सभी जाली हैं। जिन नौ लोगोंं ने अपनी जमीन बेचने का दावा पेपर में किया था, वह भी बुड़बुड़ या सरायपाली के निवासी नहीं हैं। फर्जी हैं। इसके बाद दंपति को ठगी को पता चला।

समाज सेवक बन कर कर रहा था धोखाधड़ी
शंकरलाल रजक ने क्षेत्र में अपनी पहचान समाजसेवक के रूप में बना रखी थी। शादी, भोज भंडारे में लोगों को सहायता राशि देकर हितैषी बना हुआ था, लेकिन इसके गलत कारनामों की फाइल कड़ी दर कड़ी खुलती जा रही है। इससे लोगों के सामने इसका असली चेहरा सामने आने लगा है। फिलहाल वह जेल में बंद है।

कुसमुंडा थाने में लिखाई रिपोर्ट
दंपति ने धोखाधड़ी की शिकायत कुसमुंडा थाने में है। पुलिस ने जांच के बाद शंकरलाल रजक, उसके दो पुत्र रवि व अजय रजक और एक अन्य सहयोगी सिद्धार्थ महंत के खिलाफ आईपीसी की धारा ४२० (धोखाधड़ी), ४६७ (जाली दस्तावेज की बनाकर), ४६८ (छल के मकसद से) व ४७१/३४ (जाली का असली की तरह उपयोग करना)के तहत केस दर्ज किया है। सिद्धार्थ दर्री का निवासी है। पुलिस को पता चला है कि वह फर्जी दस्तावेज बनाने में माहिर है।