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शहर में प्रस्तावित वायशेप ओवरब्रिज ठंडे बस्ते में, 2022-23 तक शहर में डीएमएफ से नहीं होंंगे एक भी काम, कलेक्टर ने ये कहा…

DMF: डीएमएफ के मास्टर प्लान से कोरबा शहर को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है। 2022-23 तक ना तो वायशेप ओवरब्रिज का निर्माण होगा और ना कहीं अंडरब्रिज बनेंगे।

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शहर में प्रस्तावित वायशेप ओवरब्रिज ठंडे बस्ते में, 2022-23 तक शहर में डीएमएफ से नहीं होंंगे एक भी काम, कलेक्टर ने ये कहा...

शहर में प्रस्तावित वायशेप ओवरब्रिज ठंडे बस्ते में, 2022-23 तक शहर में डीएमएफ से नहीं होंंगे एक भी काम, कलेक्टर ने ये कहा...

कोरबा. शहर की सड़कों को गवर्निंग काउंसिल (Meeting Governing Council) ने पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है। जितने भी प्रस्ताव दिए गए थे सभी को गैर जरुरी समझकर प्लानिंग में शामिल ही नहीं किया गया है।
भाजपा शासनकाल में डीएमएफ से शहर में जो कार्य हुए उससे जनता को फायदा तो मिला नहीं, अब जब कांग्रेस की डीएमएफ की प्लानिंगऌ सामने आई तो शहर को पूरी तरह से निराशा ही हाथ लगी। छह माह से इंतजार में बैठे शहरवासी डीएमएफ की प्लानिंग की 133 कार्यों के बीच शहर की सुविधा तलाश रहे हैं।

सबसे हैरत वाली बात है कि सीएसईबी चौक पर प्रस्तावित वायशेप ओवरब्रिज की प्रशासन ने जरुरत ही नहीं समझी। पिछले 10 साल से शहरवासी इसी उम्मीद में थे। पिछली बार डीएमएफ से इसके लिए 20 करोड़ की स्वीकृति भी दी थी। इसके अलावा चार जगहों पर अंडरब्रिज का मामला भी ठंडे बस्ते में प्रशासन ने डाल दिया है। शहर इन रेल क्रासिंग के जाल के बीच हर रोज फंस रहा है, लेकिन इस समस्या पर किसी का ध्यान ही नहीं गया। आने वाले तीन साल तक अब प्रशासन इन सुविधाओं के बारे में अब प्लानिंग भी नहीं करेगा। क्योंकि प्रस्तावित कार्ययोजना में यह शामिल ही नहीं किया गया है।

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शहर की सड़कों-नालों के लिए चाहिए थे 50 करोड़, प्रस्ताव निरस्त
शहर की मुख्य व आंतरिक सड़कों व कई जगह नालों सहित अन्य कार्यों के लिए लगभग ५० करोड़ से अधिक का प्रस्ताव निगम ने डीएमएफ की गवर्निंग काउंसिल को भेजी थी, लेकिन इन प्रस्ताव को शामिल ही नहीं किया गया है। शहर जहां कोयला लोड वाहन सबसे अधिक गुजरते हैं लोग धूल और गड्ढे झेल रहे हैं। इसके बाद भी शहरवासियों की सुविधाओं को नजरअंदाज कर दिया गया।

कोरबा शहर के साथ-साथ अन्य निकायों का भी यही हाल
एक तरफ जहां कोरबा शहर के कई बड़े प्रोजेक्ट को हरी झंडी नहीं मिल सकी है, इसी तरह जिले के अन्य चार निकाय छुरी, पाली, दीपका व कटघोरा शहर में भी प्रस्तावित कई बड़े कार्यों को डीएमएफ की गवर्निंग काउंसिल ने स्वीकृति नहीं दी है। जबकि इन निकायों से भी करोड़ों के जरूरत वाले निर्माण कार्यों की मांग डीएमएफ से की गई थी। स्थानीय जनप्रतिनिधि इससे निराश हैं।

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ऐसे कार्यों को स्वीकृति दी गई जिसकी उपयोगिता पर अभी से उठ रहे सवाल

01. छह सौ शिक्षकों के स्पोकन इंग्लिश में खर्च करेंगे 3.75 करोड़
जिले के ५ विकासखंडों के छह सौ शिक्षकों को शिक्षा विभाग आगामी तीन साल में स्पोकन इंग्लिश का प्रशिक्षण दिलाने के नाम पर कुल 3.75 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। पहले साल ७५ लाख फिर तीन साल तक 1-1 करोड़ खर्च किए जाएंगे। एक शिक्षक के पीछे औसतन 60 हजार खर्च किए जाएंगे। इस पूरी प्लानिंग को लेकर सवाल उठना लाजिमी है, जबकि अंग्रेजी के शिक्षक पहले से जिले में है।
02. छात्रावासों में वाशिंंग मशीन, गीजर, टीवी पर साढ़े तीन करोड़
162 छात्रावासों मेंं वाशिंग मशीन, गीजर, साउंड सिस्टम, टीवी, फर्नीचर, कम्प्यूटर लगाने के नाम पर साढ़े तीन करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा सिलाई मशीन से लेकर बर्तन रखने के लिए स्टील रैक खरीदी पर भी 10 लाख खर्च किए जाएंगे। वहीं दीमक से बचाने के लिए पेस्ट कंट्रोल कराने के नाम पर 20 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। पूर्व में भी छात्रावासों का बजट सबसे अधिक था। इस बार सबसे अधिक खर्च इन्हीं पर किया जाएगा।
03. गेंदा फूल के रिकार्ड नहीं बताने विभाग को फिर गेंदा लगाने लाखों की स्वीकृति
उद्यानिकी विभाग जो पिछले तीन साल से गेंदा फूल की खेती का रिकार्ड जिला पंचायत को नहीं दिखा सका है उसे फिर से गेंदा लगाने के लिए ९६ लाख की स्वीकृति दी गई है। गेंदा के साथ-साथ मसाला व भिण्डी के लिए भी तीन करोड़ की राशि की स्वीकृति दी गई है। इससे पहले विभाग ने गेंदा फूल लगाने की जानकारी सदन को दी थी तब जनप्रतिनिधियों ने खूब हंगामा मचाया था।

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04. मबावि कह रहा खेल सामग्री नहीं इसलिए साढ़े पांच करोड़ करेंगे खर्च
अब तक वाहवाही लूटने वाला महिला एवं बाल विकास विभाग कह रहा है कि आंगनबाड़ी केन्द्रों में खेल सामग्री की कमी है। जबकि इससे पहले कई बार खेल सामग्री बांटी जा चुकी है। खेल सामग्री के नाम पर 5 करोड़ तीन साल में खर्च किए जाएंगे। इसके आलावा वजन मशीन, स्थेटेस्कोप की खरीदी मेंं भी लाखों खर्च करने की स्वीकृति मिली है। जबकि पिछली साल ही वजन मशीन केन्द्रों को दिया गया है।
05. पहले कहा पानी की दिक्कत नहीं, अब 400 स्थानों पर बोर खनन
पिछली बार खनिज न्यास से स्कूलों, आंगनबाड़ी भवनों में ढाई सौ फीट तक खनन कर पानी उपलब्ध करा कर पेयजल समस्या को जड़ से समाप्त करने का दावा किया जा रहा था। अब वही विभाग कह रहा है कि 184 आंगनबाड़ी केन्द्र, 195 स्कूलों व 116 स्वास्थ्य केन्द्रों में पानी की कमी है। इसलिए तीन साल के लिए 32 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। पूर्व में पीएचई द्वारा कराए गए बोर खनन के कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत पर आज तक जांच नहीं हो सकी है।

-जितने भी विभागों से मांग आई थी, सभी को गवर्निंग काउंसिल के सामने रखा गया था। काउंसिल ने जिन कार्यों को स्वीकृति दी है वे काम कराए जाएंगे। डीएमएफ से शहर और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में काम कराए जाएंगे। बड़े प्रोजेक्ट जो शहर के लिए जरूरी है उन कार्यों को भी कराना प्रस्तावित है। किरण कौशल, कलेक्टर, कोरबा