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यहां कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में लग जाते हैं घण्टो, जर्जर सड़क पर भारी वाहनो का दबाव लोग हो रहे परेशान

कार और सिटी बस के मुसाफिर भी हुए परेशान

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कोरबा

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Shiv Singh

Jul 20, 2018

कार और सिटी बस के मुसाफिर भी हुए परेशान

कार और सिटी बस के मुसाफिर भी हुए परेशान

कोरबा. जर्जर हो चुके कुसमुंडा कोरबा मार्ग पर राहगिरों को जाम से निजात नहीं मिल रही है। शुक्रवार को मार्ग पर फिर जाम लग गया। छोटी बड़ी गाडिय़ों के मुसाफिर और चालक घंटों फंसे रहे। सिटी बस में बैठे यात्री इतने परेशान हो गए कि बस से नीचे उतर गए। पैदल चलकर कोरबा पहुंचे। बाइक चालक भी बड़ी मुश्किल से बाहर निकल सके।


भारी वाहन चालकों की लापरवाही और प्रशासनिक उदासिनता से शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे कोरबा कुसमुंडा मार्ग पर फिर जाम लग गया। एक एक बड़ी गाडियों सड़क पर खड़ी हो गई। देखते ही देखते सर्वमंगला पुलिस चौकी से इमलीछापर चौक पर गाडिय़ों की लंबी कतार लग गई। वाहनों चालकों ने सड़क पर गाडिय़ों इतनी बेतरतीब तरीके से लगा दी कि बाइक चालक भी बड़ी मुश्किल से बाहर निकल पा रहे थे।

कार से लेकर सिटी बस तक जाम में फंस गई। कई घंटे की इंतजार के बाद भी जाम नहीं खुला तो मुसाफिर पैदल कोरबा या कुसमुंडा की ओर रवाना हुए। स्थानीय लोगों ने बताया कि मार्ग शुक्रवार सुबह लगभग आठ बजे जाम हुआ। दोपहर दो बजे तक सड़क पर आवागमन बाधित रहा। बाद में स्थानीय लोगों ने पुलिस के साथ मिलकर पहल की इसके बाद जाम खत्म हुआ। लोगों का कहना है कि मार्ग जर्जर हो चुका है। सड़क पर छोटे बड़े गड्ढ़े बन गया है।

इसमें पानी भरा हुआ है। वाहन चालक गड्ढ़ों से बचकर चलना चाहते हैं। रोड पर दांय बांये चलते हैं। इसबीच सामने से कोई बड़ी गाड़ी आ जाती है तो जाम की स्थिति बन जाती है।

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रेल फाटक भी बड़ा कारण
सर्वमंगला मंदिर के पास रेलवे का फाटक है। यह फाटक अक्सर बंद रहता है। भारी गाडिय़ां फाटक पर खड़ी रहती है। धीरे धीरे गाडिय़ों की संख्या बढ़ जाती है। गाडिय़ों की कतार सर्वमंगला चौकी तक पहुंच जाती है। इसके बाद आवागमन बंद हो जाता है।

सबसे अधिक कोल ट्रांसपोर्ट
इस मार्ग से सबसे अधिक कोयले का परिवहन होता है। एसईसीएल की गेवरा, दीपका या कुसमुंडा खदान से बालको, लैंको को कोयले की आपूर्ति सड़क मार्ग से भी होती है। रायगढ़ और चांपा जांजगीर जिले में भी कोयला कुसमुंडा- कोरबा मार्ग से होकर जाता है। इससे मार्ग पर भारी वाहनों का दवाब हमेशा रहता है।


चौड़ीकरण पर ध्यान नहीं
इस मार्ग पर 18 और 22 पहिये वाली भारी गाडिय़ां चलती है। उसपर 28 टन तक कोयले का परिवहन किया जाता है। लेकिन मार्ग की चौड़ाई कम है। वर्तमान में यह मार्ग जर्जर हो चुका है। इससे सड़क दुर्घटनाएं भी बढ़ रही है।

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