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CG News: 25 बरस का सफर… कोरबा बना ऊर्जा राजधानी, 8 हजार मेगावाट बिजली से रोशन हो रहा देश

Korba News: छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस अवधि के दौरान कोरबा में बिजली और कोयला उत्पादन के क्षेत्र में रिकार्ड प्रगति हुई है। जिले में सरकारी और निजी क्षेत्र के बिजली प्लांट की बदौलत देश दुनिया के मानचित्र में कोरबा जिले की एक अलग पहचान बनी है।
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कोरबा

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Khyati Parihar

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Updated: 2 Nov 2025, 11:39 AM IST

बिजली और कोयला उत्पादन के क्षेत्र में रिकार्ड (फोटो सोर्स- पत्रिका)

(फोटो सोर्स- पत्रिका)

CG News: छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस अवधि के दौरान कोरबा में बिजली और कोयला उत्पादन के क्षेत्र में रिकार्ड प्रगति हुई है। जिले में सरकारी और निजी क्षेत्र के बिजली प्लांट की बदौलत देश दुनिया के मानचित्र में कोरबा जिले की एक अलग पहचान बनी है। कोरबा में आज राज्य पावर कंपनी के अलावा सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बिजली प्लांटो से लगभग 8 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। कोयला उत्पादन में भी कोरबा जिले की अपनी विशेष पहचान बनी है।

एक नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से अलग होकर जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ तब इस नवोदित प्रदेश के लिए आगे का सफर काफी चुनौतियों से भरा था। अपने 25 वर्षों के सफर में प्रदेश ने विभिन्न क्षेत्रों में विकास का कीर्तिमान बनाया है। कोरबा जिले में होने वाले बिजली व कोयला उत्पादन के चलते भी प्रदेश ने विकास की ऊंचाइयों को और छुआ है। जब छत्तीसगढ़ का गठन हुआ तब राज्य बिजली कंपनी के प्लांटों की उत्पादन क्षमता लगभग 1780 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर 2840 मेगावाट हो गई है।

बीते 25 वर्षों के दौरान कोरबा में पावर कंपनी के एक नए बिजली प्लांट और विस्तार यूनिट की स्थापना हुई। वर्ष 2008 में डीएसपीएम की 500 मेगावाट प्लांट की स्थापना हुई और वर्ष 2013 में एचटीटीपी के 500 मेगावाट विस्तार प्लांट की भी स्थापना हुई। इसी तरह 2016 में जांजगीर के मड़वा में एक हजार मेगावाट के एक अन्य संयंत्र की स्थापना से कंपनी की बिजली उत्पादन क्षमता और भी बढ़ गई।

निजी कंपनियों की बिजली से भी अन्य राज्य रोशन

वहीं सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी जमनीपाली प्लांट की बिजली उत्पादन क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई। राज्य गठन के पहले इस प्लांट की बिजली उत्पादन क्षमता 2100 मेगावाट थी। वर्ष 2010 में यहां 500 मेगावाट की एक अन्य संयंत्र की स्थापना के बाद एनटीपीसी कोरबा की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़कर 2600 मेगावाट हो गई। वर्तमान में इस प्लांट से बनने वाली बिजली से न केवल छत्तीसगढ़ रोशन हो रहा है बल्कि मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, दमनदीव व नागर हवेली को भी बिजली की आपूर्ति की जाती है। इसी तरह निजी कंपनियों की बिजली से भी अन्य राज्य रोशन होते हैं। औद्योगिक विकास में भी जिले के बिजली संयंत्रों की विशेष भूमिका रही है।

इस अवधि के दौरान कोरबा जिले में सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के अलावा निजी क्षेत्र के बिजली संयंत्रों की भी आधारशिला रखी गई। बालको में 540 मेगावाट बिजली प्लांट और 2013 से 2016 के बीच 1200 मेगावाट के बिजली संयंत्र का निर्माण हुआ।

इसी तरह वर्ष 2009-10 में कोरबा में लैंको अमरकंटक के 600 मेगावाट प्लांट की स्थापना हुई। वर्तमान में इस बिजली प्लांट का संचालन अब अन्य कंपनी के अधीन है। यहां आने वाले समय में 1320 मेगावाट बिजली उत्पादन और होगा। वर्तमान में कोरबा जिले में स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी, एनटीपीसी और निजी कंपनी के बिजली संयंत्र से लगभग हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

कोरबा के कोयले से पूरी हो रही देश की ऊर्जा ज़रूरतें, कई राज्य हो रहे रोशन

जिले में पावर सेक्टर के साथ ही कोल सेक्टर में भी काफी प्रगति हुई है। कोयला क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के दौरान लगभग 25 वर्ष पहले एसईसीएल के कोयला खदानों की उत्पादन क्षमता लगभग 60 मिलियन टन थी।

इसमें से कोरबा जिले में स्थित एसईसीएल की खदानों से ही लगभग 40 मिलियन टन कोयले का उत्खनन होता था। लेकिन वर्तमान में कोरबा क्षेत्र, कुसमुंडा, दीपका और गेवरा की खदानों की उत्पादन क्षमता बढ़कर 160 मिलियन टन से अधिक हो गई है। यहां के खदानों से निकलने वाले कोयले से ही प्रदेश व अन्य राज्यों की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो रही है। कोरबा में स्थित एसईसीएल की गेवरा खदान आज दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कोयला खदान है।

पावर कंपनी के 1320 मेगावाट सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट की पड़ी नींव

जिले के सबसे पुराने 440 मेगावाट कोरबा पूर्व सयंत्र के बंद होने के बाद प्रदेश की बिजली आवश्यकताऔर बढ़ने लगी। इसे देखते हुए सरकार ने साल भर पहले एचटीपीएस दर्री प्लांट परिसर में ही 1320 मेगावाट क्षमता के सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट की नींव रखी गई,अब इस प्लांट के निर्माण की प्रक्रियाएं भी आगे बढ़ी है। इस प्लांट के बनने से पावर कंपनी की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ जाएगी और बिजली के क्षेत्र में प्रदेश की आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी।