बाजी पलटने के मूड में भू विस्थपित, स्टांप पेपर में लिखवाकर देंगे किसी एक प्रत्याशी को समर्थन

41 गांव के विस्थापित इंतजार कर रहे प्रत्याशी की घोषणा का

By: JYANT KUMAR SINGH

Published: 17 Oct 2018, 11:27 AM IST

कोरबा. जिले के कटघोरा विधानसभा में 41 गांव के भू विस्थापितों को इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए दमदार प्रत्याशी चाहिए। फिलहाल वह प्रत्याशियों की घोषणा होने का इंतजार कर रहे हैं। विस्थापितों का स्पष्ट तौर पर कहना है कि प्रत्याशियों की घोषणा होने के बाद वह सभी से बारी-बारी से मिलेंगे। जो प्रत्याशी उन्हें नौकरी, मुआवजा व पुनर्वास संबंधी समस्याओं से निजात दिलाने की बात स्टांप पेपर में लिखकर देगा उसे वह सभी एकतरफा समर्थन करेंगे।


इसके पहले जिले के एसईसीएल गेवरा, दीपिका, कुसमुंडा व कोरबा से प्रभावित भू- विस्थापितों ने अटल विकास यात्रा का बहिष्कार कर दिया था। ऊर्जाधानी भू विस्थापित समिति में 41 गांव के विस्थापित शामिल हैं। जिनसे 20 हजार परिवार प्रभावित हैं। मतदाताओं की संख्या 12 से 15 हजार के बीच है। बात करें कटघोरा विधानसभा की तो यहां 85 गांव विस्थापन का दंश झेल रहे हैं। वर्तमान में यहां 22 ऐसे गांव हैं, जहां विस्थापन की तैयारी चल रही है। इनकी जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। जबकि शेष सभी गांव के लोगों के जमीन का अधिग्रहण पूर्ण हो चुका है। इस क्षेत्र में 12 पुनर्वास ग्राम भी बसाए गए हैं। कटघोरा में कुल मतदाताओं की संख्या एक लाख 95 हजार है।

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दिल्ली तक गए फिर भी नहीं निकला समाधान
ऊर्जाधानी भू विस्थापित संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि वह सभी चार बार मुख्यमंत्री से व दो बार केन्द्रीय कोयला मंत्री से मिल चुके हैं। एसईसीएल गेवरा ,दीपका,कुसमुंडा व कोरबा से प्रभावितो की समस्या से अवगत कराया था। लेकिन केवल झूठा आश्वासन दिया गया और समस्या का निराकरण अभी तक नहीं किया गया है। विस्थापितों की मांग है कि नए केन्द्रीय भूमि कानून के प्रावधान के अनुसार वर्तमान बाज़ार भाव का 04 गुना मुआवजा देना चाहिए। लेकिन राज्य शासन से विधानसभा में प्रस्तावित कर इसे 02 गुना कर दिया है। इसके अलावा कोल इंडिया की आर एण्ड आर पॉलिसी 2012 में संशोधन की मांग कोयला मंत्री पीयूष गोयल से मिलकर किया था लेकिन आज तक इसमें भी संशोधन नहीं हो पाया है।


40 साल से नौकरी का इंतजार
कटघोरा विधानसभा में ही एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदान मौजूद है। इसका खनन सन् 1960 के दशक मे प्रारंभ है। समस्याओं की शुुरूआत भी इसी समय हुई। विस्थापितों की मानें तो अब भी ऐसे कई भू विस्थापित मौजूद है। जो 40 साल से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। नौकरी के इंतजार वह बूढे हो चुके हैं। जिन्हें नौकरी मिली उनकी जमीन अधिग्रहित हो चुकी है। अब दूसरी पीढी के पास कमाई का कोई जरिया नहीं है। एक पीढी को नौकरी अब दूसरी बेरोजगार है। विस्थापन का दर्द झेल रहे विस्थापितों की मानें तो कभी ठीक तरह से पुनर्वास नहीं कराया गया। एसईसीएल के अफसर सदैव अपने दायित्वों से बचते रहे हैं। जनप्रतिनिधि भी एसईसीएल पर कभी दबाव नहीं बना पाए।

30 साल तक बोधराम ने किया प्रतिनिधित्व
कटघोरा विधानसभा का लगातार छ: बार कांग्रेस के बोधराम कंवर विधायक बने जबकि विधानसभा चुनाव 2013 में भाजपा के लखनलाल देवांगन ने उन्हें 13 हजार 130 वोट से हरा दिया था। पहली बार विधानसभा पहुंचने वाले लखन को राज्य शासन से संसदीय सचिव का भी दर्जा दिया है। जबकि इसी क्षेत्र से ज्योतिनंद दुबे को राज्य खाद्य आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। कांग्रेस व भाजपा ने आगामी चुनाव के लिए प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। जबकि जनता कांग्रेस ने गोविंद सिंह राजपूत का टिकट कटघोरा से फाईनल कर दिया गया है।


-वर्तमान में हम राष्ट्रीय पार्टियों द्वारा प्रत्याशी की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही प्रत्याशी घोषित होंगे। हम भाजपा, कांग्रेस व जनता कांग्रेस सभी के प्रत्याशियों से मिलेंगे। जो हमें स्टांप पेपर में हमारी समस्याओं के निराकरण का वादा करेगे समर्थन उसे ही देंगे। खुलकर प्रचार भी करेंगे। हमें ऐसा प्रत्याशी चाहिए जो मांग पूरी ना होने खदान बंद करा देने की क्षमता रखता हो। पार्टी से फर्क नहीं पड़ता।
-मंजीत सिंह, मीडिया प्रभारी, ऊर्जाधानी भू विस्थापित समिति

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