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हाथियों का भी कानून, गणेश हथिनियों से कर रहा था छेड़खानी, उसका हुआ ये हाल

हाथियों का भी कानून, गणेश हथिनियों से कर रहा था छेड़खानी, उसका हुआ ये हाल
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कोरबा

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Chandu Nirmalkar

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Updated: 15 Jul 2018, 3:37 PM IST

CG News

हाथियों का भी कानून, गणेश हथिनियों से कर रहा था छेड़खानी, उसका हुआ ये हाल

राजकुमार शाह@कोरबा. करतला के घने जंगलों में अपने परिवार से अलग होकर अकेले जीवन बिता रहा गणेश वन विभाग के लिए नई चुनौती बन गया है। इसकी गतिविधियां देख हाथियों के दल प्रमुख ने इसे समूह से अलग कर दिया है। इससे गणेश और आक्रामक हो गया है। एक महीने में उसने चार ग्रामीणों को कुचलकर मार डाला है।

वन्य जीव विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय गणेश मद अवस्था (प्रजनन काल) में है। हाथी 16 से 20 वर्ष के बीच वयस्क हो रहा होता है। इस दौरान टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन का स्राव ज्यादा मात्रा में होता है। नर हाथी अपने ही दल की हथिनियों से छेडख़ानी करने लगते हैं। बच्चों के साथ भी उनका व्यवहार शैतानी वाला हो जाता है। गणेश ऐसा ही व्यवहार कर रहा था। इसीलिए उसे समूह ने बेदखल किया है।

दो हाथी दल से अलग, गणेश ज्यादा खतरनाक
विभाग के मुताबिक करतला क्षेत्र में 52 हाथी हैं। फिलहाल दो हाथी दल से अलग-थलग होकर घूम रहे हैं। जिसमें दूसरा हाथी वह है जिसने कुदमुरा में ग्रामीण की जान ली थी। इसकी उम्र करीब 40 वर्ष है और ज्यादा आक्रामक नहीं है। लेकिन गणेश ज्यादा खतरनाक है।

वन अमला भी आश्चर्यचकित

हाथी का प्रजननकाल अधिकम डेढ़ माह का होता है। वन विभाग के अनुसार गणेश का प्रजननकाल जून के पहले सप्ताह में शुरू हुआ है, जिसे अब तक समाप्त हो जाना चाहिए। वह अब भी दल से अलग है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि गणेश अब दल से अलग होकर अकेले ही मस्तमौला की तरह जीवन बिता रहा है। हालांकि दल से अलग होकर हाथी दल से ज्यादा दूर नहीं जाते और व्यवहार सामान्य होने पर दल में लौट आते हैं।

इसलिए कर देते हैं लोगों पर हमला
अधिकांश हाथी जब दल से अलग होते हैं, तब उनके मद अवस्था में होने की संभावना रहती है। इस दौरान उन्हें पर्याप्त खाना न मिले तो वे और भी उग्र हो जाते हैं। कोई ग्रामीण उन्हें जंगल में अकेला दिख जाए तो वह उस पर हमला कर देते हैं। हालांकि हाथियों का प्रजनन काल महज डेढ़ माह ही होता है। गणेश के मामले में प्रजनन काल ज्यादा दिन चल रहा है।

1246 हेक्टेयर में है करतला वन क्षेत्र का फैलाव
क रतला क्षेत्र में वन विभाग के तीन रेंज आते हैं। इनका कुल क्षेत्रफल 1246 हेक्टेयर है। हालांकि इसमें कई गांव भी हैं। कई ग्रामीण तो ऐसे हैं जो जंगल के बीचो-बीच घर बनाकर बसे हुए हैं। इन्हें देख हाथी बौखला जाते हैं। एक दशक के दौरान वनविभाग के करतला क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही बढ़ी है।

दल से अलग होकर जंगलों में विचरण कर रहा गणेश इन दिनों मद अवस्था में है। यह अवस्था अब समाप्ति की ओर है। इस अवधि में हाथी ज्यादा खतरनाक होता है। ऐसे में ग्रामीणों को जंगल में न जाने की सलाह दी गई है।
मनीष कश्यप, एसडीओ (वन), कोरबा