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पंचायत ने महिला से कोरे कागज पर हस्ताक्षर करा लिखा तलाकनामा, आयोग ने जताई आपत्ति

CG Korba News: बताया जाता है कि हरदीबाजार क्षेत्र में रहने वाली एक महिला की शादी सामाजिक रीति-रिवाज से हुई थी। महिला पेशे से आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता है। समय के साथ पति-पत्नी के बीच दूरियां बढ़ने लगी। इसके पहले ही महिला के पति ने उसके नाम पर 75 हजार रुपए का कर्ज उठा लिया। इसकी भरपाई करने के लिए महिला को कहा। महिला का कहना था कि 75 हजार रुपए के कर्ज में से आधी राशि का इस्तेमाल घर में किया गया।

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Korba News: इस पैसे घर में एक शौचालय बनाया, शेष राशि इधर-उधर पति ने उड़ा दिया। पति द्वारा पैसे खर्च किये जाने से महिला नाराज हो गई और दोनों के बीच विवाद खड़ा हो गया। पति की हरकत से तंग होकर महिला अपने मायके चली गई। महिला का आरोप है कि उसके पति ने शादी के समय मिले जेवर को भी अपने पास रख लिया। गहने गायब करने का लांछन भी पत्नी पर लगा दिया। तब विवाद सुलझाने के लिए गांव में एक पंचायत बैठी। महिला ने पंचायत में यह कहते हुए पति के साथ रहने से इंकार कर दिया कि पति को शराब पीने की बुरी आदत है।

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नशे में पति उसके साथ मारपीट भी करता है। तब पंचायत में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने महिला से तलाक देने के लिए कहा। एक सादे कागज पर महिला से हस्ताक्षर करा लिया और बाद में इस पर तलाक से जुड़ी शब्दों को लिखा गया। इसी आधार पर दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए। लेकिन पति ने कर्ज की राशि नहीं लौटाई बल्कि पत्नी को ही इसे लौटाने के लिए कहा। परेशान होकर पत्नी ने महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया। शुक्रवार को आयोग के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। आयोग ने महिला के पति और उसके परिवार वालों की क्लास ली। इसमें पति ने अपनी गलती को स्वीकार किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग के अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने पुलिस के अधिकारियों से बातचीत की और महिला की रिपोर्ट पर केस दर्ज करने के लिए कहा।

प्रदेश की नई सरकार ने अध्यक्ष से छीनी सुरक्षा

इधर मीडिया से चर्चा करते हुए आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने कहा कि प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद से उनकी सुरक्षा हटा ली गई है। वह बिना सुरक्षा के ही प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार से अपनी सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने बताया कि सरकार उनकी सुरक्षा नहीं लौटाई तो आने वाले दिनों में कोर्ट की अवमानना का मामला भी दर्ज करेंगे। चर्चा के दौरान आयोग की सदस्य अर्चना उपाध्याय भी मौजूद थीं।

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पेड़ों को बचाने के लिए महिलाएं पहुंचीं आयोग की चौखट पर

आयोग के समक्ष पति-पत्नी और घरेलू प्रताड़ना से हटकर एक अन्य प्रकार का मामला भी आया। इसमें विकासखंड पाली में रहने वाली महिलाओं ने बताया कि ग्राम बतरा में गौचर भूमि है। यहां पर पेड़ लगे हुए हैं। गांव में रहने वाला एक व्यक्ति इस गौचर भूमि पर कब्जा कर रहा है। पेड़ों को काट रहा है। यह पहला मामला है जब गांव में रहने वाली 10 से 15 महिलाएं गांव की गौचर भूमि और यहां लगे पेड़ों को बचाने महिला आयोग के पास पहुंची। आयोग ने महिलाओं की शिकायत को गंभीरता से लिया। आयोग की अध्यक्ष ने कोरबा कलेक्टर से बातचीत कर तीन माह के भीतर जांच करने कहा।