
हाईकोर्ट (photo-patrika)
Good News: कोल इंडिया के अधिकारियों की लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगति का मामला अब सुलझते दिख रहा है। क्योकि वेतन विसंगति को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। इस निर्देश के बाद कोयला मंत्रालय द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों को लागू करने का रास्ता साफ भी हो गया है। इससे कोल इंडिया के अधिकारियों, विशेषकर जूनियर अधिकारियों के वेतन में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो सकेगी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब जूनियर अधिकारियों के लिए न्यूनतम वेतन 60 हजार रुपए तय किए जाने की अनुशंसा को अमल में लाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। यह फैसला उन अधिकारियों के लिए बड़ी राहत वाली है, जो बीते कई वर्षों से वेतन विसंगति का सामना कर रहे थे। कोयला कर्मचारियों का 11 वे वेतन समझौता के लागू होने के बाद कर्मचारियों का वेतन अधिकारियों से अधिक हो गया था। अधिकारियों के मुताबिक इससे पद, जिम्मेदारी और वेतन के बीच असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इसी वेतन विसंगति को लेकर जूनियर कोयला अधिकारियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद कोयला मंत्रालय ने संयुक्त सचिव के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। समिति को कोल इंडिया के अधिकारियों के पे-ग्रेड अपग्रेडेशन और वेतन विसंगति से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया गया था। समिति ने तय समयसीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें न्यायालय में प्रस्तुत कीं। हाईकोर्ट ने समिति की रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए इसके क्रियान्वयन की दिशा में स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
समिति ने अपनी सिफारिशों में कोल इंडिया के अधिकारियों के वेतनमान को ओएनजीसी समेत अन्य महारत्न कंपनियों के अधिकारियों के समान करने का सुझाव दिया। कोयला मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक स्वीकृति भी प्रदान कर दी है। कोयला अधिकारी संगठनों ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।
समिति की रिपोर्ट के मुताबिक वेतन फिटमेंट वर्ष 2017 से लागू किया जाएगा। जबकि वेतन वृद्धि का प्रभाव 2021 से माना जाएगा। इसके अनुरूप अधिकारियों को बकाया एरियर्स का भुगतान भी किया जाएगा। अनुमान है कि इस वेतन पुनरीक्षण से कोल इंडिया पर सालाना लगभग 515 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। पहले भी कोयला सचिव को किया गया था।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 7 जनवरी को हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कोयला सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। जूनियर अधिकारियों की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि वेतन समझौते के बाद उत्पन्न विसंगति के कारण उन्हें उनके पद और जिम्मेदारियों के अनुरूप वेतन नहीं मिल पा रहा है, जिसे दूर किया जाना आवश्यक है। अधिकारियों का कहना है कि 2017 से वेतन फिटमेंट व 2021 से बढ़ोतरी का लाभ मिलना तय है।
समिति की अनुशंसा के अनुसार ई-1 ग्रेड के अधिकारियों का न्यूनतम वेतन 40 हजार रुपए से बढ़ाकर 60 हजार रुपए हो जाएगा। इसके अलावा ग्रेड-7 तक के अधिकारियों के लिए संशोधित वेतनमान तय किए गए हैं। इससे न केवल वेतन विसंगति समाप्त होगी, बल्कि अधिकारियों के पद और जिम्मेदारियों के अनुरूप उन्हें वेतन और सुविधाएं भी मिल सकेंगी। संगठनों का कहना है कि यह निर्णय अधिकारियों की वर्षों लंबी कानूनी लड़ाई का सकारात्मक परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि कोल इंडिया प्रबंधन सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कर जल्द से जल्द इस वेतन संशोधन को लागू करेगा।
Published on:
09 Jan 2026 12:42 pm
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