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रिपोर्ट में हुआ ऐसा खुलासा जिससे सरकारा के उड़े होश, प्रदेश को रोशन करने वाले विद्युत संयंत्र से इतने का घाटा

अलग-अलग यूनिट जहां लंबे समय तक बंद रहे

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कोरबा

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Shiv Singh

Jul 25, 2018

अलग-अलग यूनिट जहां लंबे समय तक बंद रहे

अलग-अलग यूनिट जहां लंबे समय तक बंद रहे

कोरबा. छत्तीसगढ़ के सरकारी विद्युत उत्पादन संयंत्रों की स्थिति बेहद खराब होती जा रही है। हालात यह हो गए हैं कि हर माह करोड़ों के नुकसान पर ये संयंत्र चल रहे हैं। पांच साल में अलग-अलग यूनिट जहां लंबे समय तक बंद रहे। तो वही मेंटनेंस के नाम पर भी करोड़ों रूपए फूंका जा रहा है।


राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी की पांच साल की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2013-14 से लेकर 2017-18 तक पांच साल में हर वर्ष किसी न किसी बिजली संयंत्र में तकनीकी खराबी की वजह से इकाईयां बंद रही। 2013-14 में चार प्रमुख संयंत्र की ईकाईयां 264 दिन तक बंद रहे। इसी तरह 2014-15 में 350 दिन तक, सबसे अधिक 2015-16 व 2016-17 में ईकाईयों को बंद रखा गया। इसमें 2015-16 में 630 दिन तक, 2016-17 में 592 दिन तक बंद रहे।

जैसे कि कोरबा पूर्व की छह ईकाईयां क्रमश: 129, 91, 170, 59, 63 व 15 दिन तक बंद रहे। इसी तरह 2017-18 में दिसंबर तक कोरबा पूर्व की 580 सहित अन्य प्लांटों के यूनिट्स 52 दिन तक बंद रहे। इस तरह पिछले पांच साल में ये यूनिट 2558 दिन तक बंद रहे।

उत्पादन कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार इन यूनिटों के तकनीकी खराबी की वजह से बंद रहने की वजह से उत्पादन में लगभग 4600 मिलियन यूनिट्स की कमी आई है। जब-जब ये यूनिट्स बंद रहे जरूरत पडऩे पर उत्पादन कंपनी ने सेंट्रल सेक्टर से बिजली की खरीदी की। मेंटनेंस में लगभग 30 करोड़ रूपए खर्च करना पड़ गया। सरकारी प्लांटों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। एक तो यूनिट के बंद होने से नुकसान तो दूसरी तरफ मेंटनेंस पर भी करोड़ों रूपए खर्च करने पड़ रहे हैं।

हर संयंत्र में बिजली बनने की लागत अलग-अलग है। जैसे डीएसपीएम में प्रति यूनिट के पीछे दो रूपए 70 पैसे, दो रूपए 30 पैसे में पूर्व संयंत्र, अन्य प्लांटों में भी औसतन तीन रूपए प्रति यूनिट की लागत से बिजली बन रही है।
प्लांट में लगातार हो रही खराबी


पुरानी हुई इकाईयां : संयंत्रों की इकाईयां काफी पुरानी हो चुकी है। खासकर कोरबा पूर्व संयंत्र में इस वजह से बार-बार तकनीकी समस्या सामने आ रही है।


कर्मचारियों की कमी : वर्तमान में सभी प्लांटों में हर यूनिट में कर्मचारियों की संख्या आधे से भी कम हो चुका है।


समय पर रखरखाव का अभाव : समय पर संयंत्रों का रखरखाव नहीं होने की वजह से यूनिट्स बार-बार ट्रिप हो जा रही हैं।


-इकाईयों के बंद रहने की पीछे कई वजह होती है। तकनीकी तौर पर फाल्ट आने पर यूनिट्स को बंद भी रखा जाता है। इसके अलावा भी कोयले की आपूर्ति से लेकर उसके ग्रेड भी मायने रखते हैं।
-राजेश वर्मा, मुख्य अभियंता, एचटीपीपी संयंत्र कोरबा पश्चिम