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हंगामे के बीच रेलवे जीएम व डीआरएम का पुतला फूंका

कोरबाञ्चपत्रिका. यात्री टे्रनों के परिचालन में रेलवे प्रबंधन की मनमानी को लेकर रेल संघर्ष समिति व आक्रोशित लोगों ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन किया। जीएम व डीआरएम का पुतला फूंका गया। इस बीच पुलिस कर्मियों ने पुतले पर पानी डालकर आग बुझाया। लगभग ४५ मिनट चले प्रदर्शन में लोगों ने प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश जाहिर किया।

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हंगामे के बीच रेलवे जीएम व डीआरएम का पुतला फूंका

हंगामे के बीच रेलवे जीएम व डीआरएम का पुतला फूंका

मंगलवार की शाम पांच बजे ओवरब्रिज रेलवे फाटक के पास रेल संघर्ष समिति ने रेलवे प्रबंधन के खिलाफ यात्री टे्रनों को लगातार प्रभावित करने को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। रेलवे प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। हंगामे के बीच एसईसीआर बिलासपुर डीआरएम व जीएम का पुतला दहन किया गया। समिति के सदस्यों ने कहा रेलवे प्रबंधन कोयला लदान को लेकर पूरा जोर दे रहा है और यात्री सुविधाओं को धीरे-धीरे छीनी जा रही है। समिति के सदस्य मनोज अगवाल ने कहा कि कोरोना काल के नाम पर बंद की गई टे्रनें अब तक शुरू नहीं की गई, कोरोना काल के बाद जो सुविधाएं दी उसे भी प्रभावित किया जा रहा है। रेलवे प्रबंधन धीरे-धीरे कोरबा स्टेशन से भी सुविधाएं प्रभावित कर रही है। रेलवे प्रबंधन कोरबा के स्थानीय अधिकारी से लेकर मुख्यालय के अधिकारियों को यात्री सुविधाओं को लेकर कोई सरोकार नहीं है। प्रबंधन द्वारा राजस्व बढ़ाने और कोयला लदान पर इतिहास रचने के नाम पर कोयला लदान पर जोर दिया जा रहा है। अब रेलवे प्रबंधन की मनमानी नहीं चलेगी।
प्रदर्शन के समर्थन में जिला ऑटो संघ भी सामने आए। संघ के अध्यक्ष गिरीराज सिंह ठाकुर ने रेलवे प्रबंधन के रवैय्ये को जमकर कोसा। कहा कि यात्री टे्रनें नहीं चलने से ऑटो चालकों की आय कम हो गई है। इस कारण चालकों को काफी परेशानियां हो रही है। आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान समिति के सदस्य रामकिशन अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, अंकित सावलानी, शंकर कोडवानी, नवीन वरणदनी, भारत रोहरा, हरीश दुआ, सुकेश, विपिन कुमार, कन्हैया रोजवानी, महेश बेरीवाल, राजेश अग्रवाल सहित अन्य मौजूद थे।


नहीं बनी बात, तो होगा रेल चक्काजाम
प्रेम मदान ने कहा कि रेलवे प्रबंधन की मनमानी अब नहीं चलेगी। रेल संघर्ष समिति सहित अन्य सामाजिक संगठन व लोगों रेलवे प्रबंधन के रवैय्ये से आक्रोश हैं। इस बार प्रबंधन के अधिकारियों का पुतला दहन किया गया है। दो से तीन दिनों के भीतर यदि यात्री सुविधओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो उग्र आंदोलन के साथ रेल चक्काजाम किया जाएगा।


जनप्रतिनिधियों पर जताई नाराजगी
प्रदर्शनकारियों ने रेलवे प्रबंधन की मनामानी के बाद भी जिले के जनप्रतिनिधियों के सक्रियता को लेकर भी नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिले में ही कई दिग्गज जनप्रतिनिधि हैं। इसके बाद भी यात्री टे्रनों को बहाल नहीं करा सके। समिति ने जनप्रतिनिधियों के रवैये पर भी हैरानी जताई है। उनकी नीतियों की आलोचना की।