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रेलवे के अधिकारी व कर्मचारी ड्यूटी के बाद थाम रहे सिलाई मशीन, कोरोना को मात देने तैयार कर रहे मास्क

Railway: मास्क बनाने परिवार के अन्य सदस्य भी कर रहे मदद, रेलवे स्टेशन के बाहर गरीब-तबकों का भी रखा जा रहा ख्याल, दिया जा रहा भोजन

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रेलवे के अधिकारी व कर्मचारी ड्यूटी के बाद थाम रहे सिलाई मशीन, कोरोना को मात देने तैयार कर रहे मास्क

रेलवे के अधिकारी व कर्मचारी ड्यूटी के बाद थाम रहे सिलाई मशीन, कोरोना को मात देने तैयार कर रहे मास्क

कोरबा. रेलवे कर्मियों का जज्बा देखते ही बनता है। देश को आर्थिक संकट से उबारने जहां 12 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं। वहीं ड्यूटी के बाद कोरोना संक्रमण रोकने के प्रयास में मास्क की कमी को दूर करने घरों में मास्क तैयार कर रहे हैं। पुराने कपड़े को सिलकर मास्क तैयार किया जा रहा है। इतना ही नहीं सोशल डिस्टैंसिंग को बनाए रखने ये कर्मचारी एक जगह नहीं बल्कि अपने-अपने घरों में मास्क बना रहे हैं। मास्क बनाने के लिए रेलवे के पुराने बेडशीट का उपयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं रेलवे स्टेशन के बाहर गरीब-तबकों को भी भोजन देकर इस संकट की घड़ी में उन्हें सहारा प्रदान कर रहे हैं।

इस तरह प्रतिदिन 15 से 16 घंटे तक कार्य कर कोरोना वायरस को मात देाने युद्ध स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। इस कार्य में रेलवे अधिकारी से लेकर कर्मचारी जुटे हुए हैं। बिलासपुर मंडल ने रेलवे कर्मचारियों को मास्क बनाने का सामान (कपड़ा) उपलब्ध कराया है। अधिक से अधिक मास्क बनाने की कोशिश लगातार इन कर्मियों के द्वारा जारी है। ताकि अधिक से अधिक लोगों तक मास्क पहुंच सके। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाया जा सके। इसमें स्टेशन मास्टर आनंद गुप्ता सहित चार परिवार भी अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

आनंद गुप्ता ने बताया कि कोरोना वायरस को हराने और आर्थिक संकट के विषम परिस्थिति में रेलवे कर्मचारी देश को आर्थिक रूम से मजबूत और बिजली उत्पादन के लिए विभिन्न कंपनियों तक कोयला पहुंचा रहे हैं। इसी तरह सफाई कर्मी, जो अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से निभा रहे हैं। इन्हें मास्क की काफी जरूरत है, लेकिन बाजार में मास्क नहीं मिल रहे हैं। इसलिए मास्क बनाया जा रहा है। ताकि सभी कर्मचारियों और जरूरतमंदों को मास्क मिल सके।







पुराने बेडशीट का उपयोग
क्षेत्रीय रेलवे प्रबंधक मनीष अग्रवाल ने बताया कि बिलासपुर मंडल से मास्क बनाने के लिए कपड़े उपलब्ध कराए गए हैं। अभी तक 50 बेडशीट मिले हैं। कपड़े समाप्त होने के बाद और भी बेडशीट आएगा। रेलवे के पांच कर्मचारियों के परिवार भी अपने-अपने घरों पर मास्क बना रहे हैं। कुछ और परिवारों ने भी इस कार्य में सहयोग देने की इच्छा जाहिर की है। अभी तक लगभग 150 से अधिक मास्क बनकर तैयार किए जा चुके हैं।

अधिक से अधिक मास्क बनाने कोशिशें लगातार जारी है। इतना ही नहीं अब और भी कर्मचारी इस कार्य में जुडऩे लगे हैं। रेलवे ने इसका नाम कोविड-19 रेलवे टास्क फोर्स दिया है। ताकि लोगों को बाजार से महंगे दाम पर मास्क नहीं खरीदना पड़े। इस मास्क का उपयोग दोबारा किया जा सकता है, लेकिन इसे एक बार इस्तेमाल करने के बाद अच्छी तरह से सफाई करनी होगी। ताकि इसके जर्म समाप्त हो जाएं।

जरूरतमंदों को खिला रहे भोजन
कोविड-19 रेलवे टास्क फोर्स के तहत रेलवे कर्मचारियों द्वारा जरूरतमंदों व गरीब तबके के लोगों को भोजन खिलाने का भी काम कर रहे हैं। ताकि कोरोना के प्रभाव से एक भी सदस्य भूखा ना रहे। दरसअसल कफ्र्यू की वजह से दुकानें व होटल बंद हैं। रोजी-मजदूरी बंद हो गई है। इससे सबसे अधिक परेशानी मजदूर वर्ग व गरीब तबके को उठानी पड़ रही है।