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पांच साल से हॉस्टल बनकर तैयार सरकार से नहीं मिल रहा सेटअप

हायर सेकंडरी की उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिए छात्र-छात्राओं की रुचि बढ़ी है। वनांचल व ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों की सुविधा के लिए तीन से चार साल पहले करोड़ो रुपए की लागत से ३५० बेड वाली भवन निर्माण कराया गया है, लेकिन छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था, फर्नीचर से लेकर सेटअप (कर्मचारी) की कमी की वजह से भवन खंडहर होने के कगार पर है। छात्र-छात्राएं मजबूरी में किराए के मकान में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

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पांच साल से हॉस्टल बनकर तैयार सरकार से नहीं मिल रहा सेटअप

,,पांच साल से हॉस्टल बनकर तैयार सरकार से नहीं मिल रहा सेटअप

कोरबा. नए शिक्षा सत्र के लिए महाविद्यालयों में तैयारियां शुरू हो गई है। जिले में उच्च शिक्षा के लिए लगभग २२ शैक्षणिक संस्थाएं हैं। इन महाविद्यालयों में हायर सेकेंडरी की परीक्षा उत्तीर्ण के बाद करने के बाद हर साल लगभग साढ़े सात से अधिक विद्यार्थी स्नातक की विभिन्न कक्षाओं में प्रवेश लेते हैं।

इसमें से अधिकांश विद्यार्थी 30 से 40 किलोमीटर दूर ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं। इसके अलावा कई ऐसे भी विद्यार्थी हैं, जो 60 से 70 किलोमीटर की दूर में रहते हैं। ऐसे में इन विद्यार्थियों के लिए नियमित सफर कर उच्च शिक्षा प्राप्त करना संभव नहीं होगा। इस कारण छात्र-छात्राओं को महाविद्यालय में प्रवेश के बाद महाविद्यालय के आसपास किराए का मकान लेेने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है।

तब जाकर बड़ी मुश्किल से मकान मिलती है। इसी में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। जिले में उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों की पहली प्राथमिकता पीजी कॉलेज रहती है। यहां अध्ययन के पर्याप्त संसाधन, पुस्तक सहित अन्य सुविधाएं है। 150 सीटों वाली छात्रावास का भवन भी है, लेकिन प्रारंभ नहीं हो सकी। इसे लेकर छात्र-छात्राओं को सबसे अधिक समस्या हो रही है। इसकी वजह छात्रावास के लिए सेटअप, फंड, फर्नीचर सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य सुविधाओं की कमी को बताया जा रहा है।

पदों की स्वीकृति, लेकिन सेटअप तैयार नहीं
जानकारी के अनुसार करोड़ो रुपए के तीन भवनों निर्माण कार्य पूरा हुए लगभग दो से चार साल हो गए हैं। इसे शुरू करने के लिए छात्रावास अधीक्षक, कुक, सफाई कर्मचारी, सुरक्षा गार्ड सहित अन्य कर्मचारियों की जरूरत है। होगी।

भवन के मरम्मत में होंगे लाखों रुपए खर्च
शासकीय महाविद्यालय कटघोरा, पीजी कॉलेज व हरदीबाजार के छात्रावास को लगभग पांच से 10 साल हो गए हैं, लेकिन भवन के देखरेख के अभाव के कारण जर्जर हो चुकी है। खिड़की व दरवाजे टूट गए हैं। कटघोरा महाविद्यालय के भवन का हाल बदहाल हो गया है। ऐसे में इन भवन में छात्रावास शुरू करने से पहले अब मरम्मतीकरण में लाखों रुपए खर्च करने होंगे।

छात्राओं को बसों के खाने पड़ रहे धक्के
शहर में किराए का मकान ढूंढने में छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी हो रही हैं। मकान मिलने पर भी किराए काफी महंगे हैं। बस्तियों में ही एक कमरे का मकान का किराए इन दिनों डेढ़ से दो हजार रुपए प्रतिमाह हैं। रिहायशी इलाके में किराए के मकान और भी महंगे हैं। दूसरी तरफ उप नगरीय क्षेत्र कुसमुंडा, गेवरा, दीपका, बांकीमोंगरा, हरदीबाजार, बालकोनगर, दर्री, जमनीपाली, रजगामार सहित अन्य उप नगरीय क्षेत्र की ओर से महाविद्यालय प्रतिदिन आवाजाही पर भी चार से पांच हजार रुपए से अधिक खर्च हो रहे हैं। हालांकि सिटी शुरू होने छात्र-छात्राओं को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन बसों के धक्के खाने पड़ रहे हैं।

पीजी कॉलेज के पास दो छात्रावास भवन है। इसमें से एक छात्रावास का हैंडओवर महाविद्यालय को नहीं मिला है। एक अन्य छात्रावास को शुरू करने की तैयारी जारी है। सुरक्षा व्यवस्था, सेटअप, फर्नीचर के लिए शासन को अवगत कराया गया है।
-डॉ. साधना खरे, प्राचार्य, लीड कॉलेज