26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Doctor’s Day : 21 साल से ग्रामीण क्षेत्र में दे रहे सेवा फिर भी कोई गिला शिकवा नहीं

- जरूरत पडऩे पर दवाइयां भी खरीद कर देते हैं मरीज को

2 min read
Google source verification

कोरबा

image

Shiv Singh

Jul 01, 2018

Doctor's Day : 21 साल से ग्रामीण क्षेत्र में दे रहे सेवा फिर भी कोई गिला शिकवा नहीं

Doctor's Day : 21 साल से ग्रामीण क्षेत्र में दे रहे सेवा फिर भी कोई गिला शिकवा नहीं

कोरबा. आज के युग में जब कोई डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर मरीजों की सेवा करना पसंद नहीं करते उनको हरदीबाजार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के डॉ. एएन कंवर से सीख लेनी चाहिए। डॉ. कंवर २१ साल से हरदीबाजार में रहकर मरीजों का इलाज करते आ रहे हैं। रात हो या दिन हर समय मरीजों के लिए उपलब्ध रहते हैं।

अस्पताल के ओपीडी में प्रतिदिन औसत 50 मरीजों को देखते हैं। यही नहीं जरूरत पडऩे पर गरीब मरीजों को अपनी ओर से दवाइयां भी खरीदकर देते हैं। डॉक्टर कंवर 25 साल से ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर मरीजों की सेवा करते आ रहे हैं। पहले उनकी पोस्टिंग दूरस्थ ग्रामीण अंचल रामपुर में थी। छह साल तक रामपुर में मरीजों का इलाज किया।

इस बीच सन् 1995 में उनका तबादला हरदीबाजार के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ने मध्यप्रदेश की सरकार ने कर दिया। तब से अभी तक हरदीबाजार में रहकर मरीजों का इलाज करते हैं। प्रेक्टिस के दैरान कई ऐसे मौके आए जब लगा कि मरीज की जान खतरे में है। खासकर सर्पदंश और जहर खुरानी के मामले में, लेकिन डॉ. कंवर ने हार नहीं मानी। मरीजों की जान बचाने के लिए हर संभव कोशिश की।

चिकित्सकों की परेशानी को हल करते हुुए चिकित्सकीय शिक्षा देना है उद्देश्य

वहीं आईएमए की जिला सचिव डॉ. मंजुला साहू ने बताया कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के जिले में कुल 196 चिकित्सक सदस्य हैं। इनकी सहायता व लोगों मेें चिकित्सकीय दायित्वों के संबंध में जागरूकता लाने को ही आईएमए अपना प्रमुख्य कर्तव्य मानती हैं। इस विषय में आईएमए की जिला सचिव डॉ. मंजुला साहू का कहना है कि आईएमए चिकित्सकों पर आई किसी भी तरह की विपत्ति से लडऩे के लिए उनके साथ खड़ा रहता है, लेकिन आज के दौर में लोगों को चिकित्सा के बारे में जागरूक करना बेहद आवश्यक है, यह काम भी हम नियमित तौर पर करते रहते हैं। हाल ही में जो कानून केन्द्र सरकारी द्वारा बनाया गया है। उसके अनुसार स्टॉफ की गलती का दण्ड भी चिकित्सक को ही मिलेगा। इसके विरोध में भी हमने संगठित तौर पर आवाज बुलंद की थी।

जन स्वास्थ्य की बेहतरी और चिकित्सकों की आपसी परेशानियों को दूर करना ही संघ प्रमुख उद्देश्य है। जिसके लिए आईएमए निरंतर प्रयासरत है। जिले के सभी चिकित्सक सदस्यों की कोशिश रहती है। माह में एक या दो मीटिंग करें। जिसमें हम किसी मरीज के इलाज के दौरान आई चुनौतियों पर चर्चा करते हैं। ऐसी बैठकों का लक्ष्य यही होता है कि धरातल पर उभरक सामने आई चुनौतियों को एक-दूसरे सें साझा कर व्यावहारिक अनुभवों से सीख ली जाए जिससे कि हमारा काम समाज के लिए और भी बेहतर हो सके।