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#Topic Of The Day – राजनेताओं की मदद करते-करते खुद बन गए माननीय, ऐसे तत्वों के खिलाफ अभियान जरूरी

- राजनीतिक शुचिता के लिए पत्रिका समूह द्वारा चलाए जा रहे महा अभियान की सराहना की

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कोरबा

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Shiv Singh

Apr 16, 2018

#Topic Of The Day - राजनेताओं की मदद करते-करते खुद बन गए माननीय, ऐसे तत्वों के खिलाफ अभियान जरूरी

टॉपिक ऑफ द डे ..

कोरबा .राष्ट्रीय कवि संगम की अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने कहा कि राजनीति को स्वच्छ बनाने के लिए ईमानदार व समाजसेवी लोगों को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि पहले राजनेताओं ने अपना चुनाव जीतने के लिए इन तत्वों का इस्तेमाल किया और अब यही तत्व चुनाव जीतकर खुद राजनीति में हावी हो गए हैं।

गायत्री शर्मा पत्रिका डॉटकाम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे में हिस्सा लेने के लिए पत्रिका कार्यालय पहुंची। उन्होंने राजनीतिक शुचिता के लिए पत्रिका समूह द्वारा चलाए जा रहे महा अभियान की सराहना करते हुए कहा कि अब राजनीति में अपराधियों के दखल से समाज पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। राजनीति में प्रमुख पदों पर काबिज ऐसे अपराधी तत्वों के सरंक्षण में अपराध बढ़ रहे हैं और जब पुलिस इनके खिलाफ कार्रवाई करती है तो बड़े नेता सुरक्षा कवच बन जाते हैं। बड़ी मुश्किल से कार्रवाई हो पाती है।

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कई संगीन मामलों में विधायक तक अरेस्ट हो चुके हैं। राजनीतिक शुचिता न होने से विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई निर्णयों से अपराधमुक्त राजनीति की दिशा में देश आगे बढ़ा है लेकिन अभी भी यह स्थिति है कि गंभीर अपराध से जुड़े मुकदमे ३०-३० साल तक चलते हैं और नेता चुनाव दर चुनाव जीतते रहते हैं। इस प्रकार के मुकदमों को त्वरित निपटारा किया जाना चाहिए ताकि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिल सके।

उन्होंने कहा कि राजनीति में इतनी शुचिता होनी चाहिए कि अगर किसी व्यक्ति पर लांछन भी लग गया तो उसे राजनीति से दूर हो जाना चाहिए। कवियत्री शर्मा ने कहा कि समाज के लोग भी चुनाव के वक्त अपराधी किस्म के उम्मीदवारों को फूल मालाएं पहनाते हैं,उनका स्वागत करते हैं जबकि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए, बल्कि राजनीतिक शुचिता के लिए संगठित होकर अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के खिलाफ जागरूक होकर मतदान करना चाहिए।

उन्होंने इस खास मौके पर एक कविता भी सुनायी
...कुर्सियों की दौड़ में लगी हुई हैं हस्तियां
दिशाहीन भ्रष्ट राजनीति का बुखार है
सुबह का इंतजार है, सुबह का इंतजार है।