
सड़क दुर्घटना में हर माह मारे जा रहे इतने लोग, आंकड़ें जानकर आपके उड़ जाएंगे होश, पढि़ए खबर...
कोरबा. सड़क पर हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है। भारी गाडिय़ां राहगीरों की मौत बनकर दौड़ रही है। सड़क दुर्घटना में 10 से 15 राहगीर हर माह मारे जा रहे हैं। इसमें दुपहिया वाहन चालकों की संख्या सबसे अधिक है। सड़क हादसे में होने वाली मौतों से पता चलता है कि इसे रोकना शासन प्रशासन के वस में नहीं है। ड्राइविंग के दौरान चालक अपने और सामने वाले के जान की कीमत समझे। रफ्तार को काबू में रखे तो हादसे में जरूर कमी आएगी।
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जिले में बढ़ती सड़क दुर्घटना को रोकने की कवायद सात साल से चल रही है, लेकिन दुर्घटनाएं कम नहीं हो रही है। सड़क पर आए दिन राहगीरों की जान जा रही है। सरकारी आकड़े बताते हैं कि कोरबा जिले में हर साल औसत १९५ लोग सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं। एक हजार से अधिक घायल होते हैं। इसे रोकने के लिए प्रशासन और पुलिस पहल कर रही है, लेकिन जमीन पर इसके अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं। एक के बाद एक होती सड़क दुर्घटना से मरने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है। सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं कोरबा- चांपा और राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या १११ पर हुई है। कोरबा-कुसमुंडा, कोरबा हरदीबाजार मार्ग पर घटनाएं हुई हंै।
खनिज न्यास के फंड का हो उपयोग
सड़क दुर्घटना रोकने के लिए सड़क सुरक्षा समिति की बैठक समय-समय पर होती है। इसमें कई निर्णय लिए जाते हैं। लेकिन अमल करने के लिए रुपए की जरूरत बतायी जाती है। बैठक में लोक निर्माण, परिवहन और पुलिस कई बार कह चुकी है कि उनके पास फंड नहीं है। ऐसे खनिज न्यास मद का उपयोग किया जा सकता है। राशि का प्रवधान प्रशासन चाहे तो कर सकता है। अभी तक खनिज न्यास के पैसे उपयोग को लेकर तैयार की गई कार्य योजना में सड़क हादसे जैसा महत्वपूर्ण बिन्दु का शामिल नहीं किया गया है। इस फंड का उपयोग भवन, सड़क और पुल पुलिया बनाने बन अधिक किया जा रहा है। जबकि उससे जरूरी सड़क दुर्घटना को रोकना है।
छह साल पहले कलेक्टर ने बनाई समिति
छह साल पहले तत्कालीन कलेक्टर रजत कुमार ने जिले में होने वाली सड़क हादसों को रोकने के जिला स्तर पर एक समिति का गठन किया है। इसमें परिवहन विभाग के अलावा पुलिस और लोक निर्माण विभाग को शामिल किया था। समिति ने निगम क्षेत्र, कोरबा-चांपा, कोरबा-अंबिकापुर और कोरबा- बिलासपुर मार्ग का दौरा किया। २६ ऐसे स्थानों को चिन्हित किया, जहां अक्सर सड़क हादसे होते हैं। लेकिन उनके तबादले के साथ सड़क दुर्घटना को रोकने के लिए बनी योजना भी फाइलों में बंद हो गई। आने वाले अफसरों ने पुरानी कार्य योजना पर गंभीरता नहीं दिखाई।
वर्ष मृतकों की संख्या
2008 -212
2009 -201
2010 -160
2011 -142
2012 -150
2013 -126
2014 -194
2015 -193
2016 -203
2017 -197
Published on:
02 Jul 2018 10:33 am
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