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आठ के बजाए 12 घंटे काम, निर्धारित दर से आधा वेतन, प्रशासन ने तलब किया उपस्थिति रजिस्टर

कोरबा. कोयला खदानों में कार्यरत ठेका मजदूरों की शोषण के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित न हो इसे लेकर प्रशासन सर्तक है। प्रशासन ने ठेका कंपनियों को मजदूरों की उपस्थिति रजिस्टर और लेबर पेमेंट सर्टिफिटेक के साथ कटघोरा एसडीएम दतर में शनिवार को उपस्थित होने के लिए कहा है।

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आठ के बजाए 12 घंटे काम, निर्धारित दर से आधा वेतन, प्रशासन ने तलब किया उपस्थिति रजिस्टर

आठ के बजाए 12 घंटे काम, निर्धारित दर से आधा वेतन, प्रशासन ने तलब किया उपस्थिति रजिस्टर

इससे मजदूरों का शोषण करने वाली ठेका कंपनियों की परेशानी बढ़ गई है। तमाम हथकंडे अपना रही हैं, जिससे की प्रशासन को गुमराह किया जा सके। मजदूरों की मांग पर शुक्रवार को गेवरा में कटघोरा एसडीएम की उपस्थिति में एक बैठक आयोजित की गई। इसमें गेवरा खदान में काम करने वाली सभी ठेका कंपनियों के अधिकारी और स्थानीय प्रबंधन से जुुड़े अफसर शामिल हुए। भू- विस्थापितों की मांग पर चर्चा शुरू हुई।

भू- विस्थापितों की ओर से इंटक जिलाध्यक्ष श्यामू जायसवाल ने बातों को रखा। गेवरा खदान में काम करने वाली दो ठेका कंपनियों पर आठ के बजाए १२ घंटे तक मजदूरों से काम कराने का आरोप लगाया। एसडीएम को बताया कि १२ घंटे तक काम कराने के बाद कंपनियां मजदूरों को निर्धारित दर से आधा वेतन दे रही हैं।

उन कंपनियों का नाम बताया जो कागज पर हस्ताक्षर कराकर मजदूरों को निर्धारित दर से आधा वेतन दे रही हैं। ठेका मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा से वंचित करने का आरोप लगाया। इन सभी मामलों को लेकर एसडीएम ने ठेका कंपनियों से जबाव तलब किया। कंपनियों की ओर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

इसपर एसडीएम नाराज हो गए। उन्होंने सभी ठेका कंपनियों को कड़ी फटकार लगाते हुए शनिवार को मजदूरों की उपस्थिति रजिस्टर और लेबर पेमेंट सर्टिफिकेट सहित अन्य दस्तावेज लेकर कटघोरा कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा।

गेवरा प्रबंधन को फटकार
बैठक में एसडीएम ने गेवरा प्रबंधन के अधिकारियों को भी फटकार लगाया। ठेका मजदूरों के मामले में दायित्वों का निर्वहन सही तरीके से नहीं करना पाया।

26 दिन ड्यूटी पर न्यूनतम 26 हजार वेतन
इंटक जिलाध्यक्ष ने बताया कि खदान में काम करने वाले ठेका मजदूरों के लिए कोल इंडिया की हाई पॉवर कमेटी ने रेट निर्धारित किया है। इसके तहत अकुशल मजदूरों को आठ घंटे काम करने पर न्यूनतम 1022 रुपए मजदूरी देने का प्रवधान है। इसके अनुसार 26 दिन काम करने पर मजदूरों को २६ हजार 572 रुपए दिया जाना चाहिए। ठेका मजदूरों को कागजों में यह वेतन मिल रहा है। जबकि वास्तव में मजदूरों को आठ से 10 हजार रुपए ही मिल रहा है।

छह और नौ जून को होने वाली जनसुनवाई का विरोध
कोयला खदान से प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले ठेका मजदूरों ने मांग पूरी नहीं होने पर छह और नौ जून को क्रमश: गेवरा और दीपका में होने वाली जनसुनवाई का विरोध करने की चेतावनी दी है।