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हादसे की वजह न बन जाए स्कूलों का खंडहर भवन

कोरबा. जिले में 680 से अधिक भवन ऐसे हैं, जो अत्यंत जर्जर और अनुपयोगी है। इसमें से अधिकांश स्थानों पर विभाग ने स्कूल परिसर में नए भवन तो बना दिए, लेकिन पुराने भवन को ढहाने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई। यह भवन खंडहर हो चुके हैं। धीरे-धीरे छत का प्लास्टर गिर रहा है। दीवार भी गिरने के कगार पर है। इससे हादसे की आशंका बनी हुई है।

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हादसे की वजह न बन जाए स्कूलों का खंडहर भवन

हादसे की वजह न बन जाए स्कूलों का खंडहर भवन

नए शिक्षा सत्र की शुरूआत के साथ ही स्कूलों में नियमित रूप से कक्षाएं शुरू हो चुकी है। बारिश का मौसम है, लेकिन जिले के जिम्मेदार विभाग के अफसरों को स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। समय-समय पर जिला शिक्षा विभाग की ओर से जर्जर और अत्यंत जर्जर हो चुके भवनों का रिपोर्ट तैयार किया गया।

इसी के साथ स्कूल के मैदान परिसर में ही नए भवन तैयार किए। इसमें से कई स्कूलों का संचालन नए भवन में किया जा रहा है। अफसरों ने नए भवन बनाने को लेकर सक्रियता तो दिखाई, लेकिन पुराने भवन, जो जर्जर हालत में है, उसे उसी हालत में छोड़ दिया गया। कई वर्षों से यह इसी हालत में हैं और अब यह खंडहर हो चुकी है।

विभाग ने प्राक्लन तैयार कर इसे अनुपयोगी साबित कर दिया है, लेकिन ढहाने को लेकर किसी तरह की पहल नहीं की गई। कोरबा विकासखंड के रिस्दी में ही शासकीय प्राथमिक शाला के लिए नया भवन बनाया गया, लेकिन पुराने भवन को नहीं तोड़ा गया। इसी परिसर में पूर्व माध्यमिक शाला भी संचालित है। इसके अलावा आंगनबाड़ी का पुराना भवन भी खंडहर हालत में छोड़ दिया गया है। इसी तरह की स्थिति जिले के लगभग 680 से अधिक शासकीय प्राथमिक शाला के साथ ही पूर्व माध्यमिक, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल के अनुपयोगी साबित हो चुके भवनों की है। स्थिति यह है कि भवन के छत से आए दिन प्लास्टर गिर रहे हैं।

कई स्कूलों के पुराने भवन के दीवार भी गिरने के कगार पर है। ऐसे में शिक्षक और अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। हालांकि स्कूल नए भवन में लगाए जा रहे हैं, लेकिन खेल-कूद की छुट्टी में बच्चे खंडहर भवनों की ओर नहीं जाए।

इसके लिए शिक्षक बच्चों की ओर नजर बनाए रहते हैं। कई बार बच्चे पुराने भवनों की भी चले जाते हैं।इसे लेकर अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाने लगे हैं।

मैदान परिसर में ही नए और पुराने भवन
विभाग की ओर से स्कूल के मैदान में ही नए भवन बनाए गए हैं और पुराने भवन पहले से ही थे। एक ही मैदान में दो स्कूल का भवन होने से खेल का मैदान भी सीमट गया है। इस कारण बच्चों को क्रिकेट, फुटबॉल सहित अन्य खेल के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल रहा है। खेल-कूद में काफी असुविधा हो रही है। ऐसे में बच्चे खेल-कूद के लिए दूसरे मैदान की ओर जा रहे हैं।

अनुपयोगी भवनों पर एक नजर
विकासखंड अनुपयोगी भवन
कोरबा 108
कटघोरा 160
पोड़ी उपरोड़ा 140
करतला 122
पाली 150