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पीक पर पावर प्लांट लडख़ड़ाए

कोरबा. पीक आवर में प्रदेश के पावर प्लांट के यूनिट लडख़ड़ा जा रहे हैं। बिजली की सबसे अधिक डिमांड 15 मार्च से चार मई के बीच बढ़ी है। इसी अवधि में प्रदेश के सरकारी और निजी थर्मल प्लांट के 11 यूनिट घंटो बंद रहे। नेशनल पावर पोर्टल ने 6 मई को रिपोर्ट सार्वजनिक की है।

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अब तक उपभोक्ताओं को अगले एक-दो दिन में मरम्मत के दौरान होने वाली बिजली बंद की सूचना ही मिलती थी

अब तक उपभोक्ताओं को अगले एक-दो दिन में मरम्मत के दौरान होने वाली बिजली बंद की सूचना ही मिलती थी

इस रिपोर्ट में प्रदेशवार किस संयंत्र को सामान्य मरम्मत या फिर तकनीकी तौर पर फॉल्ट आने की वजह बंद रखना पड़ा। इसकी रिपोर्ट जारी की गई है। इसके मुताबिक प्रदेश के अलग-अलग थर्मल पावर प्लांटों के 11 यूनिट इन डेढ़ महीने में कई बार बंद हुए। गौरतलब है कि गर्मी में बिजली की डिमांड अपने उच्चतम स्तर पर है। प्रदेश के छत्तीसगढ़ उत्पादन कंपनी के तीन थर्मल प्लांट, एनटीपीसी के तीन संयंत्र समेत आधा दर्जन से अधिक निजी संयंत्र बिजली बनाते हैं। इन प्लांटों के कुल 11 यूनिट इस डेढ़ महीने में अचानक तकनीकी फॉल्ट की वजह से बंद हुए। इनके बंद होने से प्लांट पूरे लोड पर नहीं चल सके। इस वजह से प्रदेश को मिलनी वाली बिजली की आपूर्ति भी प्रभावित रही।

किस यूनिट के बंद होने से कितनी बिजली कम मिली
पावर प्लांटों के अलग-अलग यूनिटों में आए फॉल्ट की वजह से संयंत्र पूरे लोड पर नहीं चल पाए। कोरबा वेस्ट की दो नंबर यूनिट के बंद रहने से 210 मेगावाट बिजली कम मिली। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि इस यूनिट को मेंटेंस के लिए बंद किया गया था। जबकि ओपी जिंदल संयंत्र की तीन यूनिटों के बंद रहने से250-250 मेगावाट बिजली का उत्पादन प्रभावित रहा। बालको संयंत्र की 300 मेगावाट क्षमता वाली दो नंबर यूनिट 27 अप्रैल से चार मई तक बंद रही।

अप्रैल महीने में उत्पादन कंपनी के संयत्र पूरे लोड पर नहीं चले
मार्च की तुलना में अप्रैल महीने में उत्पादन कंपनी के तीनों बड़े संयत्र फुल लोड पर नहीं चल सके। एक अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच डीएसपीएम संयत्र 89.2 फीसदी पीएलएफ, कोरबा वेस्ट 74.4 और मड़वा संयंत्र का 55.5 फीसदी ही पीएलएफ रहा। तीनों संयंत्र का कुल उत्पादन क्षमता 73 फीसदी ही रही। जबकि मार्च में 80.2 फीसदी पीएलएफ क्षमता के साथ उत्पादन किया गया था।