6 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

#खेलों से स्कूलों के प्राचार्य कर रहे हैं खिलवाड़, छात्रों से पैसे लेने के बाद इस तरह हो रही है बंदरबांट

स्कूलों में भी खेल सामग्रियों की खरीदी नहीं की जाती

2 min read
Google source verification

कोरबा

image

Shiv Singh

Aug 08, 2018

स्कूलों में भी खेल सामग्रियों की खरीदी नहीं की जाती

स्कूलों में भी खेल सामग्रियों की खरीदी नहीं की जाती

कोरबा. सरकारी स्कूलों में खेलों से खिलवाड़ किया जा रहा है। खेल मद से बच्चों से हर साल लिया जाने वाला शुल्क तक जिला कार्यालय को नहीं भेजा जाता। इतना ही नहीं इस शुल्क से स्कूलों में भी खेल सामग्रियों की खरीदी नहीं की जाती। अब यह शुल्क कहां उपयोग हो रहा है। इसकी जानकारी किसी को भी नहीं है।


सरकारी स्कूलो में आठवीं तक के छात्रों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। लेकिन 9वीं के बाद से ही शुल्क लेने की व्यवस्था है। हाई स्कूल के बच्चों से 410 रुपए तो हायर सेंकेंडरी में अलग-अलग मदों को मिलाकर 475 रूपए तक लिए जाते हैं। इसमें से खेलों के आयोजन व सामग्रियों की खरीदारी के लिए हाई स्कूल में 50 तो हायर सेकेंडरी स्कूलों में 65 रूपए लिए जाने का प्रवधान है। इसके उपयोग के लिए भी मापदण्ड तय हैं। लेकिन वह केवल कागजों तक सीमित है। वास्तव में खेल मद के शुल्क में जमकर घालमेल किया जाता है।


50 प्रतिशत राशि रहती है स्कूल में
खेल मद से जितनी भी राशि छात्रों से ली जाती है। उसका 50 प्रतिशत हिस्सा स्कूल में रहता है जबकि 40 प्रतिशत राशि जिला कार्यालय और 10 प्रतिशत बीईओ कार्यालय को दिए जाने का प्रावधान है। जिससे ब्लॉक व जिला स्तर खेलों के आयोजन किए जा सके हैं। इस का स्कूल के प्राचार्य जमकर दुरुपयोग करते हैं। जिला व बीईओ कार्यालयों को शुल्क नहीं भेजा जाता। जो राशि स्कूल में रहती है। उसका क्या होता है? यह किसी को पता नहीं है। सालों से इस राशि का ऐसे ही दुरूपयोग हो रहा है।

इतना शुल्क नियमानुसार लेने का है प्रावधान
हाई स्कूल
मद- रूपए
एएफ- 50
पीजीएफ- 10
साइंस क्लब- 20
स्काउट- 50
रेड क्रॉस- 30
खेल- 50
साइंस फंड- 50
एक्जाम- 150
योग- 410


-कुछ एक्टिव खेल शिक्षकों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर स्कूल खेलों के मामले में बेहद उदासीन है। कई प्राचार्य तो छात्रों से लिए जाने वाले खेल मद की राशि, जिले में नहीं भेजते वह सीधे तौर पर इसका दुरुपयोग करते हैं।
-आरपी कैवर्त, सहायक क्रीड़ा अधिकारी