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ओडिशा के पारादीप से कोरबा के गोपालपुर आने वाली पाइप लाइन में ड्रिल कर 20 हजार लीटर डीजल ले गए चोर

कोरबा टर्मिनल में लगी मशीन तक कम पहुंचा प्रेशर

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कोरबा

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Shiv Singh

Jul 28, 2018

कोरबा टर्मिनल में लगी मशीन तक कम पहुंचा प्रेशर

कोरबा टर्मिनल में लगी मशीन तक कम पहुंचा प्रेशर

कोरबा. ओडिशा के पारादीप से इंडियन ऑयल के कोरबा टर्निमल तक जाने वाली की पाइप लाइन में सरायपाली बसना के पास ड्रिल करके चोरों ने लगभग 20 हजार लीटर डीजल की चोरी कर ली। डीजल चोरी के बाद पाइप लाइन में बोरी ठंूस दिया। प्रबंधन ने पाइप लाइन की मरम्मत कार्य को पूरा कर लिया है।

घटना शुक्रवार की रात लगभग एक बजे से दो बजे के बीच की बताई जा रही है। कोरबा टर्मिनल की मशीन पर दबाव अचानक कम हो गया। यह देखकर अफसर हरकत में आए और खोजबीन चालू की। पता चला कि सरायपाली बसना के पास पाइप लाइन में दबाव कम हुआ है। इंडियन ऑयल के अफसरों ने कार्रवाई करते हुए सुरक्षा विभाग को अलर्ट किया।

कोरबा टर्मिनल के महाप्रबंधक एके द्विवेदी ने बताया कि चोरों ने पाइप लाइन से लगभग 20 हजार लीटर (एक टैंकर) डीजल की चोरी हुई है। पाइप लाइन से सरायपाली बसना और संबलपुर के बीच छेडख़ाड़ की गई है। इसकी मरम्मत कर ली गई है। यह घटना रात में हुई है। पाइप लाइन की सुरक्षा को लेकर विभाग गंभीर है और रात में होने वाली पेट्रोलिंग को मजबूत करने की योजना बनाई गई है।

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साथ ही पाइप लाइन की सुरक्षा के लिए पुलिस से भी मदद ली जाएगी। पुलिस महानिदेशक के साथ इंडियन ऑयल के अफसर जल्द की बैठक करेंगे। इसमें पाइप लाइन की सुरक्षा बढ़ाने पर रणनीति तैयार होगी।


-ठंूस दिया बोरा
ऑयल कंपनी ने पाइप लाइन से डीजल चोरी की शिकायत सरायपाली बसना थाने में की है। पता चला है कि घटना को अंजाम देने के बाद चोरों ने ड्रिल वाले स्थान पर बोरी ठंूस दिया था। इसके बाद फरार हो गए थे। तरीका देखकर पुलिस को आशंका है कि चोरी में प्रोफेशनल गिरोह का हाथ है।


अभी सेवानिवृत्त फौजी करते हैं सुरक्षा
वर्तमान में पाइप लाइन की सुरक्षा का दायित्व डीजीआर से स्पॉन्सर प्राप्त एक निजी सुरक्षा एजेंसी को है। एजेंसी में भूतपूर्व सैनिकों को रखा गया है। प्रतिदिन एक जवान एक किलोमीटर पैदल चलता है। उल्लेखनीय है कि ओडिशा के पारादीप से पाइप लाइन जंगल के रास्ते कोरबा पहुंची है। इनमें से कुछ इलाके नक्सल प्रभावित भी हैं। जंगल भी घने हैं और इस कारण रात में एजेंसी की पेट्रोलिंग कमजोर पड़ जाती है। एजेंसी के पास संसाधन की कमी भी एक वजह है