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Employee corner- SECL के इस आदेश से 3000 अफसरों को होगा बड़ा फायदा, पढिए खबर

भुगतान के लिए आदेश जारी
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कोरबा

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Shiv Singh

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Updated: 4 Aug 2018, 12:58 PM IST

भुगतान के लिए आदेश जारी

भुगतान के लिए आदेश जारी

कोरबा. कोल इंडिया ने पीआरपी (परफारमेंस रिलेटेड पेमेंट) भुगतान के लिए आदेश जारी कर दिया है। वित्तीय 2016- 17 के लिए पीआरपी का भुगतान किया जाएगा।

अफसरों को न्यूनतम 50 हजार रुपए से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक का लाभ होगा। पीआरपी का फायदा एसईसीएल के लगभग तीन हजार कर्मचारियों होगा। इसमें कोरबा, दीपका, गेवरा और कुसमुंडा एरिया के करीब एक हजार अफसर शामिल हैं।


कोल इंडिया ने वित्तीय वर्ष 2016- 17 के लिए पीआरपी भुगतान का आदेश गुरुवार को जारी कर दिया। इसमें कहा गया है कि 60 फीसदी राशि का पीआरपी के तौर पर किया जाएगा। 40 फीसदी राशि इंक्रीमेंट बेनीफिट मद में काट ली जाएगी। राशि के भुगतान की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है। लेकिन भुगतान जल्द करने के लिए कहा है। संभावना है कि एक हफ्ते के भीतर अफसरों को पीआरपी का भुगतान एसईसीएल में कर दिया जाएगा।

हालांक पीआरपी की राशि वित्तीय 2015- 16 की तुलना में 2016- 17 में कम मिलेगी। अफसरों को न्यूनतम 50 हजार रुपए से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक की राशि प्राप्त होगी।

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कम पीआरपी का कारण कोल इंडिया के लाभांस में 2015- 16 की तुलना में 2016- 17 में कम लाभ प्राप्त होना बताया जा रहा है। एसईसीएल में तीन हजार कोल अफसर पदस्थ हैं। कोरबा, कुसमुंडा, गेवरा और दीपका एरिया में लगभग एक हजार अफसर काम करते हैं। सबसे अधिक 300 अफसर कोरबा एरिया में पदस्थ हैं।


कुसमुंडा में ठेकेदारों के बिल का नहीं हो रहा भुगतान, महाप्रबंधक को लिखा पत्र
कुसमुंडा परियोजना से ठेकेदारों के बिल का भुगतान नहीं हो रहा है। इससे ठेकेदार लामबंद होने लगे हैं। बिल के भुगतान में हो देरी से नाराज हैं। क्षेत्र के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया है। बताया है कि कुसमुंडा के बिल से संबंधित सैकड़ों फाइलें लंबित हैं। कम्प्यूटर ऑपरेटर और लिपिक की संख्या कम होने से बिल भुगतान में देरी हो रही है। कोल नेट सॉफ्ट वेयर की बाधा भी दूर नहीं हो रही है। इससे ठेकेदार परेशान हैं।

कोल नेट साफ्टवेयर की समस्या से समय पर बिल का भुगतान नहीं हो रहा है। ठेकेदारों का कहना है कि इससे मजदूरों के बिल का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। काम प्रभावित हो रहा है। कोलनेट के कारण कुसमुण्डा ही नहीं कोरबा एरिया में भी कई ठेकेदारों का बिल लंबित है। दीपका और गेवरा का हाल भी संतोषजनक नहीं है। मई से बिल भुगतान का कार्य कोल इंडिया कोलनेट साफ्टवेयर के जरिए कर रहा है।