
Big Breaking : शातिर ठग शंकरलाल रजक को अंबिकापुर पुलिस ने धर दबोचा, किराए की मकान में छिपा था आरोपी, पढि़ए खबर...
कोरबा. शातिर ठग शंकरलाल रजक को पुलिस ने अंबिकापुर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी परिवार के साथ अंबिकापुर में किराए की मकान में रहता था। पुलिस ने शंकर के पुत्र अजय रजक को भी पकड़ा है। रवि पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा है। ठग शंकरलाल रजक सहित अन्य आरोपियों के गिरफ्तारी की पुष्टि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर ने की है। उन्होंने कहा है कि आरोपियों से ठगी के संबंध में पूछताछ की जा रही है।
आरोपी अंबिकापुर में किराए की मकान में छिपा हुआ था। उसके साथ रवि और अजय रजक भी थे। पुलिस ने रविवार देर शाम शंकर रजक के अंबिकापुर में स्थित किराए के मकान में दबिश दी। शंकर और अजय को पकड़ लिया। बताया जाता है कि घटना के समय रवि सब्जी खरीदने बाहर गया था। वह पुलिस की पकड़ में नहीं आया है। आरोपियों को लेकर पुलिस कोरबा पहुंची, उन्हें बांकीमोंगरा थाने में रखा गया है। ठगी के संबंध में पूछताछ की जा रही है।
10 एफआईआर
शंकरलाल रजक पर धोखाधड़ी के 10 केस दर्ज है। पुलिस ने शंकरलाल के पुत्र रवि और अजय रजक को भी आरोपी बनाया है। दोनों के खिलाफ अलग-अलग थानों में केस दर्ज है।
उल्लेखनीय है कि खुद को नेताओं का करीबी बताने वाला शातिर ठग शंकरलाल रजक धोखाधड़ी के मामले में १० साल पहले भी जेल की हवा खा चुका है। उस समय शंकरलाल ने सरकारी पट्टे की २८ डिसमिल जमीन को निजी बताकर एक व्यक्ति को ५१ हजार रुपए में बेच दिया था। यह मामला कटघोरा की एक कोर्ट में अभी लंबित है। इसपर सुनवाई चल रही है।
वर्ष २००७ में कटघोरा के गांव हुकरा स्थित २८ डिसमिल जमीन को शंकर ने निजी बताकर इन्द्राज सिंह भाटिया को ५१ हजार रुपए में बेच दिया था। इन्द्राज ने जमीन को अपने नाम पर कराने की प्रक्रिया चालू की तो पता चला कि भूखंड सरकारी है। उसने घटना की शिकायत कटघोरा थाने में की थी। पुलिस ने अपराध क्रमांक ३३८/२००७ पर कटघोरा में आईपीसी की धारा ४२०, ४६७, ४६८, ४७१ के तहत केस दर्ज किया था। इसकी सुनवाई कटघोरा की एक कोर्ट में चल रही है। इस मामले में शंकरलाल जेल की हवा भी खा चुका है।
शातिर ठग शंकरलाल रजक कई साल से धोखाधड़ी के मामले में लिप्त था, लेकिन इसकी राजनीतिक रसूख को देखकर लोग धोखा खा जाते थे। उन्हें लगता था कि शंकर नेताओं का करीबी है। कई बार शंकर नेताओं के साथ मंच पर बैठा देखा गया था। राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रम में अतिथि बनने के लिए रुपए की फंडिंग भी करता था। उसकी दिनचर्या और लाइफ स्टाइल को देखकर लोग धोखा खा गए। अभी तक शंकरलाल पर अलग अलग थानों में धोखाधड़ी के १० केस दर्ज किए गए हैं। कवर्धा और कटघोरा में १० साल पहले हुई धोखाधड़ी को जोड़ दिया जाए तो शंकर के खिलाफ १२ एफआईआर अलग-अलग थानों में लिखे गए हैं।
Published on:
06 Aug 2018 12:30 pm
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