
सिकलसेल एनीमिया(सिकलिंग) आज समाज में एक कष्ट साध्य बीमारी के रूप में दिखायी पडऩे लगी है।
कोरबा . सिकलसेल एनीमिया(सिकलिंग) आज समाज में एक कष्ट साध्य बीमारी के रूप में दिखायी पडऩे लगी है। मूलत: यह बीमारी अनुवांशिक बीमारी है। लेकिन खान-पान, आहार-विहार, व्यसन और अज्ञात कारणों से जींस के अचानक परिवर्तन से भी यह बीमारी उत्पन्न होती है। थोड़ी सावधानी व उपचार से इस बीमारी से बचा जा सकता है।
यह कहना है डॉ.प्रदीप देवांगन का। पत्रिका डॉटकाम द्वारा आयोजित किए जा रहे टॉपिक ऑफ दे डे में शनिवार को आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ.देवांगन उपस्थित रहे। जोकि लंबे समय से सिकलसेल को लेकर जागरुकता अभियान चला रहे डॉ. देवांगन ने बताया कि इस बीमारी से प्रभावित लोगों की संख्या में नियमित वृद्धि 10 फीसदी तक पहुंच गयी है।
उदाहरण के रूप में देवपहरी में 120 लोगों का परीक्षण किया गया तो इसमें 20 लोग सिकलसेल से पीडि़त मिले थे।
लक्षण क्या हैं- इस कष्टसाध्य बीमारी के लक्षण हैं ,शरीर में खून की कमी, हाथ पैर पीला होने लगता है। सर्दी,खांसी और पीलिया आदि होने लगता है। पीडि़त व्यक्ति के हाथ-पैर के जोड़ों में दर्द होने लगता है। इस बीमारी में गुर्दे, लीवर, ह्रदय, फेफडे और तिल्ली आदि के खराब होने का अंदेशा रहता है
बचाव के लिए ये करें- डॉ.देवांगन ने बताया कि यह बीमारी जेनेटिक है। रोगी को नियमित रूप से फोलिक एसिड लेना चाहिए। सिकलिंग कुंडली मिलाकर ही शादी करनी चाहिए। खूब अधिकृत ब्लड बैंक से ही खरीदें। सुपाच्य भेजन करें और अधिक पानी पियें।
सरकारी स्तर पर क्या हो रहें प्रयास- डॉ.देवांगन ने बताया कि सिकलसेल रोकने के लिए सरकारी स्तर पर काफी प्रयास किए जा रहे हैं। सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक एवं जिला अस्पताल में नि:शुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है। यहां कोई भी व्यक्ति जांच करा सकता है।
इस प्रभावितों को इलाज कराने के लिए आवागमन करने पर रेलवे के किराए में 50 फीसदी छूट मिलती है। राज्य सरकार अंत्योदय राशन कार्ड की सुविधा देती है। सिकलसेल रोगी को दिव्यांगजनों को मिलने वाली सुविधाएं दिए जाने पर भी विचार हो रहा है।
इसके साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार ने रायपुर में सिकलसेल इंस्टीट्यूट की स्थापना की है,जहां सिकलसेल रोगियों का पूर्णत: उपचार किया जाता है। यह इंस्टीट्यूट अब तक 11 लाख लोगों की जांच कर चुका है और इसमें एक लाख लोग सिकलसेल प्रभावित पाए गए हैं।
प्रति माह लगाते हैं शिविर- सिकलसेल के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रति माह प्रथम रविवार को वैष्णव दरबार सीतामणी कोरबा में शिविर लगाया जाता है। यहां दोपहर एक बजे से शाम चार बजे तक सिकलिंग प्रभावितों का उपचार किया जाता है।
दवाएं व सलाह दी जाती है। यह शिविर पूरी तरह से नि:शुल्क है और कोई भी जांच करा सकता है। यहां जांच के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की टीम रहती है।
Updated on:
10 Feb 2018 04:06 pm
Published on:
10 Feb 2018 03:51 pm
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