
दीपका खदान का अब ऐसा हाल, उत्पादन पूरी तरह ठप, कंपनी को करोड़ों का नुकसान, मौसम रहा ठीक तो इतने दिनों बाद शुरू हो सकेगा उत्पादन
कोरबा. लीलागर नदी की धारा बदलने से दीपका खदान क एक तिहाई हिस्सा पानी में डूब गया है। सॉवेल, ड्रील और पंप डूब गए हैं। केन्वेयर बेल्ट पर कीचड़ भर गया है। खदान से दोबारा उत्पादन चालू होने में 10 से 15 दिन लगने की संभावना है।
हालांकि बारिश थमने से सोमवार को प्रशासन और दीपका खदान के प्रबंधन ने राहत की सांस ली। जिस स्थान से दीपका खदान में लीलागर नदी का पानी घुस रहा था, उसे रोक दिया गया है। पानी गिरने वाले स्थान पर बोरियां लगाकर बांध दी गई है। खदान में पानी घुसने से दीपका प्रबंधन को काफी आर्थिक नुकसान हुआ है। दो छोटी सॉवेल, एक ड्रील और पंप के अलावा कई मशीने डूब गई हैं। 42 क्यूबिक मीटर क्षमता वाली एक बड़ी सॉवले भी पानी में आधा डूब गई है। इन तीनों मशीन की कीमत 300 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। खदान में पानी घुसने से उत्पादन ठप हो गया है। लोगों के खदान क्षेत्र में जाने पर रोक लगा दी गई है।
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इधर, स्थिति का जायजा लेने सोमवार को एसईसीएल के सीएमडी एपी पंडा और तकनीकी निदेशक आरके निगम दीपका पहुंचे। खदान का अवलोकन किया। खदान में डूबी मशीनों के बारे में जानकारी ली। घटना का कारण भी जाना। अफसरों को खदान से पानी निकालने के लिए हर संभव उपाय करने के लिए कहा। सीएमडी के साथ दीपका के महाप्रबंधक बालकृष्ण चंदोरा भी उपस्थित थे।
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एनटीपीसी के सीपत संयंत्र असर की संभावना
दीपका खदान में पानी भरने से सबसे अधिक असर एनटीपीसी के सीपत संयंत्र पर पडऩे की संभावना है। सीपत संयंत्र में बिजली उत्पादन दीपका के कोयले पर निर्भर है। सीपत प्लांट पहले से कोयला संकंट से जूझ रहा है।
Updated on:
01 Oct 2019 11:29 am
Published on:
30 Sept 2019 09:13 pm
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