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क्यों आया मंत्री अमर को गुस्सा? फिर अफसरों को सुनाई खरी खोटी

पुनर्वास समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री अमर अग्रवाल ने एसईसीएल के चारों जीएम को जमकर फटकारा। दरअसल बैठक में ऐसा कोई भी सक्षम अधिकारी नहीं था

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पुनर्वास समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री अमर अग्रवाल

पुनर्वास समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री अमर अग्रवाल ने एसईसीएल के चारों जीएम को जमकर फटकारा। दरअसल बैठक में ऐसा कोई भी सक्षम अधिकारी नहीं था

कोरबा . पुनर्वास समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री अमर अग्रवाल ने एसईसीएल के चारों जीएम को जमकर फटकारा। दरअसल बैठक में ऐसा कोई भी सक्षम अधिकारी नहीं था जो कि निर्णय ले सके। इस पर मंत्री भड़क गए। अधिकारियों से कहा, जब कोई निर्णय ले ही नहीं सकते तो ऐसे बैठक का औचित्य ही क्या है?


अरसे बाद पुनर्वास समिति की बैठक कटघोरा के अग्रेसन भवन में रखी गई। बैठक की अध्यक्षता कर रहे प्रभारी मंत्री अमर अग्रवाल ने अब तक के लंबित प्रकरणों और नौकरी संबंधित मामलों की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान 1984 के नौकरी के मामले अब तक लंबित पड़े हुए हैं। इस पर मंत्री ने एसईसीएल के अधिकारियों से पूछा कि कब तक इन मामलों का निपटारा हो जाएगा, संभावित तिथि बताइए। इस पर चारों ही जीएम एक-दूसरे का चेहरा ताकने लगे। मंत्री ने फिर पूछा कि इस बैठक में कोई निर्णय लिया जाता है तो उसके लिए आप अधिकृत है या नहीं। इस पर चारों जीएम ने कह दिया कि ये उनके अधिकार में नहीं है।

दरअसल इस बैठक में एसईसीएल के सीएमडी स्तर के अधिकारियों का होना जरूरी था। मंत्री ने पूछा सीएमडी कहां हंै, तो एक ने बताया के वे दिल्ली बैठक में गए हैं। इस पर मंत्री अमर अग्रवाल भड़क गए। मंत्री ने कहा कि जब कोई निर्णय हो ही नहीं सकता तो बैठक का कोई मतलब ही नहीं है।

इस बीच कलेक्टर मो. कैसर अब्दुल हक ने भी एसईसीएल अधिकारियों से जवाब मांग, कि यह समस्या कब तक हल होगी। लेकिन जब किसी ने जवाब नहीं दिया तो कलेक्टर ने भी नाराजगी जताई। इसके बाद मंत्री अमर अग्रवाल और भी भड़क गए। मंत्री ने कहा कि जब प्रोडक्शन की बारी आती है तब तो प्रशासन और शासन से एक से दो दिन में काम कराने दौड़ लगाते हैं। लेकिन भूविस्थापितों को इतने दिन से परेशान किया जा रहा है।

इनके बारे में विचार क्यों नहीं किया जा रहा है। बैठक में भूविस्थापितों के मामले में कोई निर्णय नहीं निकलने से यहां उपस्थित प्रभावितों में काफी नाराजगी देखी गई। इनका कहना है कि हर बार शासन-प्रशासन एवं प्रबंधन द्वारा मामले को टाला जा रहा है।


पहले पुराने मामले निपटाने कहा- आखिरकार बैठक में यह निर्णय हुआ कि जब तक पुराने मामलों का निपटारा नहीं होगा, तब तक 2010 के बाद के मामलों के लिए पुनर्वास की बैठक नहीं बुलाई जाएगी। मंत्री अमर ने कहा कि हम जल्द निराकरण करने का प्रयास किया जा रहा है।


बैठक से भूविस्थापितों को किया गया बाहर- बैठक में कुसमुंडा और गेवरा के 41 प्रभावित गांव के भूविस्थापितों को बुलाया गया था। लेकिन बैठक से इन भूविस्थापितों को बाहर कर दिया गया। इसे लेकर भूविस्थापितों ने हंगामा कर दिया। नारेबाजी करते हुए कुछ देर के लिए बाहर मुख्य द्वार पर सब जमा हो गए। बाद में सबको शांत कराया गया।