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छत्तीसगढ़ के इस जिले में महिला-पुरुष खेलते हैं ये अनोखा खेल, आप भी देखें रोमांच से भरा Video

वर्षों से चली आ रही मान्यता का आज भी किया जा रहा है निर्वहन, विजेता बनने पर महिलाओं का सम्मान तथा असफल रहने पर लगता है अर्थदंड

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केल्हारी. कोरिया जिला मुख्यालय से 80 किमी दूर ग्राम पंचायत ताराबहरा के आश्रित ग्राम बैरागी में हर वर्ष होली के बाद दूसरे और तीसरे अनोखा और रोमांचक खेल होता है। इस दिन गांव की महिला और पुरुष के बीच यह खेल खेला जाता है। इसमें जंगली मुर्गा, गिलहरी, नदी से केकड़ा व मछलियां पकड़ी जाती है।

जो टीम ज्यादा मछलियां पकड़ती है उसे विजेता घोषित किया जाता है। वहीं मुर्गा, गिलहरी व खरगोश को जंगल में छोड़ दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि पुरुषों द्वारा छोड़ा गया मुर्गा और गिलहरी महिलाएं पकड़ लेती है तो वर्षभर अकाल नहीं पड़ता है।

जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत ताराबहरा का आश्रित ग्राम बैरागी बसा है। इस गांव में भारतीय कैलेंडर की होली त्योहार के ठीक तीसरे दिन इस वर्ष भी परंपरागत और अनोखी खेल स्पर्धा का आयोजन किया गया। गांव के प्रतिभागी एकजुट होकर खुले मैदान में पहुंचे और जंगली मुर्गा, गिलहरी की रोमांचक दौड़ कराई गई। प्रतियोगिता में दो समूह में बंटकर जंगल और नदी की ओर चले गए।

एक समूह पुरूष व बच्चे, दूसरे समूह में महिलाएं व युवतियां शामिल थीं। प्रतियोगिता में पहले दिन पुरूष जंगल में जाकर जंगली मुर्गा, गिलहरी और महिलाएं नदी में जाकर केकड़ा और मछली पकड़ी। स्पर्धा के दूसरे दिन महिला, पुरूष और बच्चों के लिए प्रतियोगिता शुरू हुई।

प्रतियोगिता के पहले चरण में पॉलीथीन लगाकर एक छोटा तालाब बना गया। इसमें गांव की महिलाएं जो नदी से मछली और केकड़ा पकड़कर लाई थीं, उसे छोड़ दिया गया। वहीं पुरूषों को निर्धारित समय पर तालाब से मछलियां और केकड़ा पकडऩा था। इसमें सबसे अधिक केकड़ा और मछली पकडऩे वाले को विजयी घोषित किया गया।


खुले मैदान में केकड़ा दौड़ा, सबसे तेज दौडऩे वाला केकड़ा विजेता बना
ग्रामीणों के बीच रोमांचक केकड़ा दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। महिलाएं नदी से केकड़ा पकड़ कर लाई थीं, उसे खुले मैदान में छोड़ा गया। इस दौरान सबसे तेज दौडऩे वाले केकड़े को विजेता के खिताब से सम्मानित किया गया।

वहीं खरगोश और गिलहरी दौड़ प्रतियोगिता में ग्रामीणों ने तयशुदा स्थान पर एक बड़ा घेरा बनाया था जिसमें गांव के पुरूष और महिलाएं शामिल हुईं। सीटी बजने के पुरूष वर्ग खरगोश और गिलहरी को एक साथ छोड़ दिया और खरगोश व गिलहरी को पकडऩे के लिए महिलाओं का समूह पीछे जंगल की ओर भागा।


'मुर्गा- गिलहरी को पकडऩे पर अकाल नहीं पड़ता है'
ग्राम बैरागी के ग्रामीणों के अनुसार खेल के पीछे मान्यता है कि होली के तीसरे दिन परंपरागत होली त्योहार मनाने का रिवाज वर्षों पहले शुरू की गई है और वर्तमान में बुजुर्गों के बनाए नियम का पालन कर रहे हैं। खेत में पुरूषों द्वारा छोड़ा गया मुर्गा और गिलहरी को अगर महिलाएं पकड़ लेती हैं तो गांव में वर्षभर अकाल नहीं पड़ता है।

वहीं महिलाएं यदि गिलहरी व मुर्गा को नहीं पकड़ पाती हैं तो अर्थदण्ड लगाने का भी प्रावधान रखा गया है। इससे मिलने वाली राशि सामूहिक भोज में खर्च की जाती है।