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सीएम साहब! ये कोई खंडहर भवन नहीं बल्कि है आंगनबाड़ी केंद्र, ऑफिसर देते हैं ये जवाब

शहर में 37 आंगनबाड़ी केंद्र भारी अव्यवस्था के बीच किराए के भवन में हो रहे संचालित, कई केंद्र जर्जर पर सुनने वाला कोई नहीं

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Anganwadi centers

Anganwadi center

चिरमिरी. शहर में महिला बाल विकास परियोजना द्वारा लगभग 64 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इन आंबा केंद्रों में अलग-अलग वार्डों में निवासरत एक वर्ष से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों को पोषण आहार के साथ उन वार्डों की गर्भवती महिलाओं को गर्भ अवस्था से लेकर बच्चे के जन्म दिवस तक हर संभव देखभाल एवं जांच की जिम्मेदारी का काम राज्य शासन द्वारा निर्धारित किया गया है।

बावजूद इसके लगभग सभी आंबा केंद्र भारी अव्यवस्था के बीच संचालित हो रहे हैं। इस समस्या की ओर निगम से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान नहीं है। कई आंगनबाड़ी केंद्र तो इस बारिश के मौसम में भी बिना छत के खंडहर भवन में ही संचालित हो रहे हंै।

निगम क्षेत्र अंतर्गत गड़ाबुड़ा और साजापहाड़ खंडहर व बिना छत के भवन में आंबा केंद्र संचालित है। प्रभारी अधिकारी से जब इस संबंध में बात की गई तो उनका कहना था कि इतने बड़े निगम की हर जानकारी हमें थोड़ी है।


गौरतलब है कि शहर में महिला बाल विकास परियोजना द्वारा 64 आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन किया जा रहा है। इसमें शहर के कुल 40 वार्डों में 10 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र, 7 आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र एवं बाकी 47 आंगनबाड़ी केंद्रों में मात्र 10 हंै जो स्वयं के भवन में संचालित हो रहे हैं।

बाकि 37 आंगनबाड़ी केंद्र आज राज्य के 18 वर्ष बीत जाने के बाद भी किराये के भवन में संचालित हो रहे हंै। जो इस बरसात के मौसम के देखते ही बनते हैं। इन किराये के भवन की हालत इतनी दयनीय है की अध्ययनरत बच्चों को इस बारिश के पानी में तिरपाल का सहारा लेना मजबूरी बनी हुई है।

एक कमरे में बच्चों की पढाई से लेकर भोजन बनाना, बच्चों को खिलाना, उनके मनोरंजन के लिए उपकरणों को भी उसी कमरे में उपयोग करना, इसके बाद जूठे बर्तन को भी उसी कमरे में रख कर साफ करना होता है। इतनी भारी अव्यवस्था के बीच आंबा केंद्रों का संचालन हो रहा है। इस गंभीर समस्या पर निगम प्रशासन के साथ ही प्रशासनिक अफसरों का भी ध्यान नहीं है।

जनप्रतिनिधियों का भी मौन रहना समझ से परे है। सबसे बुरी स्थिति शहर के ग्रामीण इलाकों में संचालित आंबा केंद्रों की है। जहां मॉनिटरिंग के लिए पदस्थ सुपरवाइजर तीन से चार माह के अंतराल में निरीक्षण करने जाती है और केवल मौखिक तौर पर इन केंद्रों के अध्ययनरत बच्चों की संख्या दर्ज कर शासन से मिल रही पोषक आहार का खाका तैयार कर जिला प्रशासन को भेज रही है।

वहीं वार्ड क्रमांक 1 के साजा पहाड़ एवं वार्ड क्रमांक 2 गड़ाबुडा में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवन में संचालित हैं। दोनों आंबा केंद्र इस बारिश में बिना छत के तिरपाल के सहारे चल रहे हैं। यहां एक ही कमरे में पढ़ाई से लेकर सारा काम हो रहा है। इस अव्यवस्था के बीच हर माह इन भवनों का 800 रुपए किराया भी दिया जाता है। इतनी समस्या होने के बावजूद विभागीय अफसर नए भवन निर्माण हेतु कोई पहल नहीं कर रहे हैं।


शौचालय की उपयोगिता बेकार
पानी की उचित सुविधा नहीं होने के कारण किराये दार के नाम से निर्माण हुए शौचालय में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जो किराये के भवन से लगभग 200 मीटर की दुरी पर बने हुए है। इनमे पसरी गंदगी को देख बच्चों में संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका बनी हुई है।


हर बात की नहीं होती जानकारी
अब इतने बड़े नगर निगम में क्या हो रहा है हर बात की जानकारी तो नहीं रहेगी। कार्यकर्ता जानकारी नहीं देगी तो अव्यवस्था को कैसे सुधारा जा सकता है। इसे सार्वजनिक करने के लिए हम बाध्य नहीं हैं।
सरोजनी मिंज, प्रभारी अधिकारी