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कोल माइंस से निकले 2 कोहिनूर ने फुटबॉल में लिखा ऐसा इतिहास कि 50 साल से कर्मी-अफसर दे रहे एक-एक दिन की सैलरी

Football Kohinoor: एसईसीएल चरचा के ग्राउंड में हर साल होने वाली नेशनल फुटबॉल टूर्नामेंट (National football tournament) में देश के कोने-कोने से आती हैं टीमें, विदेशी खिलाड़ी भी करते हैं शिरकत

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कोल माइंस से निकले 2 कोहिनूर ने फुटबॉल में लिखा ऐसा इतिहास कि 50 साल से कर्मी-अफसर दे रहे एक-एक दिन की सैलरी

Late R. Sheshan and Late ML Mahajan

बैकुंठपुर. Football Kohinoor: कोरिया जिले के एसईसीएल चरचा कॉलरी के सब एरिया मैनेजर और सिविल इंजीनियर की फुटबॉल के प्रति ऐसी दीवानगी थी कि यहां के छोटे से ग्राउंड में फुटबॉल की प्रतियोगिता कराई थी। यह अनोखी परंपरा कायम कर उन्होंने इतिहास लिख दिया। आज 50 साल से उनके नाम पर माइंस कर्मी अपनी एक-एक दिन की सैलरी चंदे के रूप में देकर नेशनल फुटबॉल टूर्नामेंट करा रहे हैं।


ये कहानी है एसईसीएल बैकुंठपुर एरिया के चरचा कॉलरी आरओ में पदस्थ रहे स्व. आर. शेषन और सिविल इंजीनियर स्व. एमएल महाजन की। सब एरिया मैनेजर को फुटबाल से बहुत लगाव था। इसलिए वर्ष 1965-66 में चरचा कॉलरी के एक छोटे से ग्राउंड में प्रतियोगिता की शुरुआत की। टूर्नामेंट का नाम रनिंग शील्ड रखा गया था।

इसमें आसपास के शहरी व ग्रामीण टीम हिस्सा लेती थी। कॉम्पीटिशन में फंडिंग की व्यवस्था करने का उन्होंने नायाब तरीका निकाला और कोल कर्मी-अफसरों से राय मशवरा कर एक-एक दिन सैलरी चंदा स्वरूप देने मनाया। यह अब पिछले 50 साल से एक परंपरा बन गई है।

वहीं एसइसीएल की मदद से कुछ साल बाद श्रमवीर स्टेडियम का निर्माण हुआ। फिर राष्ट्रीय स्तर की टीमें पहुंचने लगी और दर्शकों की भीड़ की वजह से बैठने की जगह नहीं मिलती थी। इसी बीच सब एरिया मैनेजर की हादसे में मौत हो गई थी।

फिर रनिंग शील्ड कॉम्पीटिशन का नाम बदलकर 1973-74 को अखिल भारतीय शेषन ममोरियल गोल्ड कप फुटबॉल टूर्नामेंट रख दिया, जो पिछले 50 साल से गोल्ड कप टूर्नामेंट के नाम पर होता है। यह छत्तीसगढ़ के नामी टूर्नामेंट में शामिल है।


महाकुंभ का रूप लिया, 47वां टूर्नामेंट में 13 राज्य की 16 टीम
अखिल भारतीय शेषन ममोरियल गोल्ड कप फुटबॉल टूर्नामेंट चरचा कॉलरी में एक उत्सव की तरह होता है। इसमें बड़ी संख्या में कॉलरी कर्मी, परिवार और आस-पास के ग्रामीण दर्शक पहुंचते हैं। सब एरिया मैनेजर की परंपरा को कायम कर कर्मी-अफसर अपनी एक-एक दिन की सैलरी चंदा स्वरूप देते हैं।

इससे टूर्नामेंट का इनाम सहित अन्य खर्च करते हैं। सबसे खास बात यह है कि एसईसीएल पूरा मैनेजमेंट संभालता है। कोरोना कॉल के कारण 3 साल तक टूर्नामेंट नहीं हुआ। बावजूद वर्ष 2023 में 47वां टूर्नामेंट चल रहा है। इसमें 13 राज्य की 16 नेशनल टीम शामिल होंगीं।


सरगुजा अंचल का सबसे बड़ा फुटबॉल ग्राउंड स्व एमएल महाजन के नाम पर
स्व. महाजन सिविल इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। एकमात्र ग्राउंड श्रमवीर स्टेडियम में दर्शकों की भारी भीड़ को देख शहर के किनारे पथरीली भूमि पर भव्य ग्राउंड बनाने का संकल्प लिया। वर्ष 1985 में भव्य ग्राउंड निर्माण कराने आधारशिला रखी गई, जिसका नाम चरचा स्टेडियम था।

स्टेडियम बनाने में करीब 5 साल का समय लगा। लेकिन उद्घाटन से पहले उनकी मौत हो गई थी। मामले में वर्ष 2004 में एसईसीएल बिलासपुर के कार्मिक निदेशक की मौजूदगी में चरचा स्टेडियम का नामकरण स्व. एमएल महाजन के नाम पर हुआ।


एक-एक दिन की देते हैं सैलरी
यह 47वां गोल्ड कप टूर्नामेंट है। कोरोना कॉल में तीन साल टूर्नामेंट नहीं हुआ। टूर्नामेंट की शुरुआत करने वाले सब एरिया मैनेजर स्व आर शेषन और स्टेडियम का नाम सिविल इंजीनियर स्व एमएल महाजन के नाम पर रखा गया है। दोनों की फुटबॉल के प्रति बहुत लगाव था। टूर्नामेंट कराने चरचा कॉलरी के कर्मी व अफसर एक-एक दिन की सैलरी देते हैं।
रियाजुद्दीन, सचिव अखिल भारतीय शेषन मेमोरियल गोल्ड कप फुटबॉल टूर्नामेंट चरचा कॉलरी