
Kotwali Baikunthpur
बैकुंठपुर. कोतवाली पुलिस ने तहसीलदार बैकुंठपुर के प्रतिवेदन पर फर्जीवाड़ा कर बेवा (विधवा महिला) की 1.250 हेक्टेयर जमीन की बिक्री-खरीदी करने वाले ३ लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। इसमें सेवानिवृत्त पटवारी और वन अधिकारी की पत्नी सहित ३ आरोपी का नाम शामिल हैं।
तहसीलदार टीकाराम देवांगन ने कार्यालय के चौकीदार अमीरसाय के माध्यम से कोतवाली में अपराध दर्ज कराया है। प्रतिवेदन में कहा किया है कि सेवानिवृत्त पटवारी रामनारायण जायसवाल पिता मदन लाल जायसवाल, बीरेन्द्र चन्द्र पिता स्व बुधराम व माधुरी सिंह पति लक्ष्मण सिंह द्वारा आपराधिक षडय़ंत्र कर ग्राम मेको की भूमि खसरा नम्बर 5/6 रकबा 1.250 हेक्टेयर की बिक्री कर दी गई है।
सेवानिवृत्त पटवारी ने डिजीटल हस्ताक्षरित बी-1 में चौहद्दी बनाया था। इससे बीरेंद्र चन्द्र ने विक्रेता बनकर क्रेता माधुरी सिंह के पक्ष में बिक्रीनामा कर दिया है। जबकि राजस्व अभिलेख में दिलकुंवर बेवा सोमारसाय के नाम से जमीन दर्ज है। मामले में कोतवाली पुलिस ने सेवानिवृत्त सहित तीन आरोपी के खिलाफ धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120-बी के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया है।
प्रतिवेदन में यह लिखा
तहसीलदार ने अपने प्रतिवेदन में यह लिखा है कि भुइयां साफ्टवेयर में उप पंजीयक कार्यालय बैकुंठपुर में पंजीकृत विक्रय अभिलेख की प्रति ऑनलाइन मिलती है। ऑनलाइन विक्रय अभिलेख का अवलोकन करते समय फर्जीवाड़ा की जानकारी मिली। विक्रयपत्र आईडी क्रमांक सीजी5813909022018002 का 9 फरवरी को अवलोकन किया गया। जिसमें ग्राम मेको की भूमि खसरा नम्बर 5/6 रकबा 1.250 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेख में दिलकुंवर के नाम से दर्ज है।
इसका फर्जीवाड़ा कर बिक्रीनामा कर दिया गया है। विक्रय पत्र में फर्म बी-1 किस्तबंदी खतौनी (आसामीवार) में पटवारी के रूप में रामनारायण जायसवाल का हस्ताक्षर हैं और चौहद्दी अंकित किया गया है। जबकि पटवारी रामनारायण बहुत पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
नोटिस का जवाब स्वीकार करने लायक ही नहीं
मामले में तहसीलदार ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था लेकिन नियत तिथि को क्रेता व जमीन मालिक न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए थे। वहीं रामनारायण एवं बीरेन्द्र द्वारा कारण बताओ नोटिस का जवाब प्रस्तुत किया गया। इसमें रामनारायण द्वारा कूटरचना किया गया है। इसके अतिरिक्त बी-1 में उनके हस्ताक्षर, सील भी है। बी-1 में प्रथमदृष्टया हस्ताक्षर उन्हीं के लगते हैं और चौहद्दी भी उन्हीं का बनाया जाना प्रतीत होता है। इससे सेवानिवृत्त पटवारी का जवाब स्वीकार करने योग्य नहीं है।
फॉरेस्ट में बड़े अफसर रह चुके हैं खरीदार के पति
तहसीलदार में अपने प्रतिवेदन में लिखा है कि के्रता माधुरी सिंह को मालूम था कि रामनारायण ग्राम मेको के पटवारी नहीं थे। इसके बावजूद कूटरचित दस्तावेज के आधार पर पंजीकृत विक्रय-पत्र का निष्पादन अपने पक्ष में कराया है, जो कि अपराध की श्रेणी में आता है।
के्रता माधुरी के पति लक्ष्मण सिंह पहले इस जिले में वन विभाग के बड़े अधिकारी के रूप में कार्य कर चुके हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि लक्ष्मण सिंह ने अपने नाम, पहचान का गलत प्रयोग कर कूटरचित दस्तावेज तैयार करवाया जाना प्रतीत होता है और उसके आधार पर अपनी पत्नी के पक्ष में बिक्रीनामा करवाया गया।
Published on:
15 Apr 2018 02:00 pm
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