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Independence Day 2021: आजादी की लड़ाई करते सन् 1942 में बनारस जेल में रहे, झेली थीं अंग्रेजों की यातनाएं

Independence Day 2021: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी (Freedom fighters) कृष्ण प्रसाद उपाध्याय ने अपनी पूरी जिंदगी खादी वस्त्रों के प्रचार-प्रसार में लगाई, वर्ष 2013 में हो गया निधन

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Independence Day 2021

Freedom fighters

मनेंद्रगढ़.राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं सर्वोदय नेता विनोबा भावे के खादी वस्त्रों के विचारों से प्रभावित होकर बनारस से एक सक्रिय किशोर क्रांतिकारी ने आजादी के लिए अपनी पूरी जिंदगी खादी वस्त्रों के प्रचार-प्रसार में लगा दी। फिर आजादी के बाद देशभर में खादी भंडार खोलने की मुहिम शुरू हुई।

बनारस के युवा क्रांतिकारी का नाम था कृष्ण प्रसाद उपाध्याय था, जो वर्ष 1957 में मनेंद्रगढ़ खादी के प्रचार-प्रसार के लिए आए थे। स्व. उपाध्याय कोरिया के गांधी आश्रम खादी भंडार के प्रथम संस्थापक सदस्य थे। खादी जगत से जुड़े हर व्यक्ति उन्हें कृष्णा भाई के नाम से जानते थे। कृष्णा भाई 1942 में बनारस के सेंट्रल जेल में रहे एवं अंग्रेजों की यातनाएं सहीं।

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पिछले छह दशक से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उपाध्याय का परिवार झुग्गी झोपड़ी नुमा मकान में निवास कर रहा है। उनके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा साहित्यकार गिरीश पंकज और छोटा सतीश उपाध्याय शिक्षक हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होते हुए भी उन्होंने कभी शासकीय सुविधा का लाभ नहीं लिया।

उत्तर प्रदेश सरकार के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी काशी भाई पीपीओ, जो तत्कालीन गांधी आश्रम गोरखपुर के संस्थापक थे। उन्होंने कृष्णा भाई को कई बार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को मिलने वाली शासकीय सुविधा से जोडऩे की कोशिश की। परंतु उन्होंने किसी सुविधा का उपयोग नहीं किया।


1943 को जेल से मुक्त कर दिया गया
वाराणसी उत्तर प्रदेश चौखंबा मोहल्ला दूध विनायक मंगला गौरी के रहने वाले स्व कृष्णा भाई ने 1942 के स्वतंत्रता संग्राम में कई यातनाएं भोगी थी। 18 जनवरी 1943 को जिला जेल वाराणसी में बंदी रहे एवं मार्च 1943 को सेंट्रल जेल बनारस भेज दिया गया था। वहीं 28 अक्टूबर 1943 को जेल से मुक्त कर दिया गया था।

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जेल से छूटते ही तत्कालीन सुप्रसिद्ध खादी आंदोलन के नेता अनिल भाई, राजा राम भाई, धीरेंद्र भाई, कपिल भाई के साथ दरिद्र नारायण की सेवा एवं खादी के प्रचार प्रसार के लिए जन आंदोलन खड़ा किया। फिर आचार्य कृपलानी एवं विचित्र नारायण शर्मा के सानिध्य में आए। कृष्णा भाई कहा करते थे खादी वस्त्र नहीं, विचार है।

गांधी आश्रम जबलपुर के मंत्री पद में भी रहे। लगभग 70 वर्षों तक खादी के प्रचार प्रसार के लिए समर्पित होकर खादी आंदोलन को आगे बढ़ाया। कृष्ण भाई का 18 मार्च 2013 में निधन हो गया।

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