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बैकुंठपुर. एक व्यक्ति ने बुजुर्ग महिला से पहले 5 लाख रुपए में 15 डिसमिल जमीन का सौदा किया, फिर धोखाधड़ी कर 15 डिसमिल की जगह 50 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करा ली। महिला को इस बात का पता तब चला जब उसके भतीजे ने उसे बताया। महिला की रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है।
कोरिया जिले के बैकुंठपुर से लगे ग्राम खरवत बनखेतापारा निवासी सुखमनिया देवी पिता स्व. रामनाथ (65)को इकलौती पुत्री होने के कारण पिता के हिस्से की सारी जमीन मिली थी।
उसके पिता चार भाई थे और सभी के नाम से सम्मिलित खाते में जमीन थी। महिला ने वर्ष २017-18 में पिता का स्वर्गवास होने के बाद 2018 में अपने पिता के हिस्से की जमीन कुल पांच प्लाट खसरा नम्बर 170/02 रकबा 0.070, 179/2 रकबा 0.255.809 रकबा 0.090 हेक्टर एवं 1444/2 रकबा 0.100, 1450/2 रकबा 0.035 हेक्टेयर मिली थी।
इस जमीन का फर्जीवाड़ा कर एक व्यक्ति द्वारा अपने नाम रजिस्ट्री कराने के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। महिला ने अपनी शिकायत में लिखा था कि तलवापारा निवासी संतकुमार पिता हरखलाल साहू बोला कि मैं पटटा अलग करा दूंगा और जो खर्च लगेगा उसे मैं लगा दूंगा।
उसके बदले में 15 डिसमिल जमीन देना और मैं 5 लाख रुपए भी दूंगा। इस पर वह तैयार हो गई थी, लेकिन 15 डिसमिल बोल कर मुझ से 50 डिसमिल भूमि का रजिस्ट्री करा लिया और मुझे सिर्फ साढ़े 3 लाख रुपए हीए दिए। शेष डेढ़ लाख रुपए भी संतकुमार ने नहीं दिए।
मेरे भतीजे देवकुमार से तीनों प्लॉट को बेचने की जानकारी मिली और भू-नक्शे में दिखाया। वहीं धोखाधड़ी कर 15 डिसमिल बोल कर तीन प्लाट का बिक्रीनामा कराया और अपने नाम रजिस्ट्री करा लिया गया है। मामले में चरचा पुलिस ने शिकायत की जांच में प्रार्थी व गवाह का बयान लेकर आरोपी के खिलाफ धारा ४२० के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया है।
अतिरिक्त 35 डिसमिल जमीन की कीमत 30 लाख आंकी
प्रार्थी सुखमनिया देवी ने अपनी शिकायत में लिखा है कि आरोपी संत कुमार साहू द्वारा मुझे धोखा देकर तय सौदा से अधिक भूमि को बिक्रीनामा करा लिया गया है।
वहीं अतिरिक्त 35 डिसमिल जमीन शामिल है और राशि भी कम दी गई है। इससे मुझे 30 लाख रुपए की आर्थिक क्षति हुई है। महिला ने आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर ३५ डिसमिल अतिरिक्त जमीन वापस दिलाने की गुहार लगाई है।
जमीन बंटवारा से महीनेभर पहले ही इश्तहार निकलवाया और नामांतरण कराया
पीडि़ता सुखमनिया, मनमोहन, रामधन, लाल कुंवर सहित सभी खातेदार ने जमीन बंटवारा कराने 3 सितंबर २०18 को हल्का पटवारी के समक्ष आवेदन दिया था लेकिन दलाल के चक्कर में भू-अभिलेख कार्यालय से 3 अगस्त 2018 को सादे कागज में इश्तहार जारी कर नामांतरण भी करा दिया गया था।
मामले को लेकर ऐसी चर्चा है कि भू-अभिलेख कार्यालय को जमीन के नामांतरण का अधिकार नहीं है। कुछ नियम के मुताबिक जमीन नामांतरण कराने का अधिकार है। बावजूद जमीन का बंटवारा कर नामांतरण भी कराया और और सभी की ऋण पुस्तिका भी बनवाकर सौंप दी। जबकि जमीन बंटवारा प्रकरण की फाइल तहसील कार्यालय में लंबित थी।
Published on:
18 Apr 2019 07:25 pm
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