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प्रोत्साहन राशि वापस मांगने पर भड़कीं मितानिनें, कहा- जब कोरोना मरीजों को कोई छूता नहीं था तब हमनें…

Mitanin's News: कोरोना प्रोत्साहन राशि (Incentive money) के 82 लाख रुपए भुगतान कर वापस लेने की बात पर मचा बवाल, 2700 मितानिनों की 4.86 करोड़ राशि भी पेंडिंग, जान जोखिम में डालकर मितानिनों ने डोर-टू-डोर (Door-to-Door) किया था कई तरह के काम

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Incentive money

Mitanins incircled CMHO office

बैकुंठपुर. Mitanin's News: कोरोना संक्रमण काल में डोर-टू-डोर कार्य कराने के एवज में मितानिनों को 82 लाख प्रोत्साहन राशि भुगतान कर वापस मांगने की बात पर भड़क गईं।

मामले में जिलेभर की मितानिनें गुरुवार को सीएमएचओ कार्यालय का घेराव करने पहुंची। इस दौरान भुगतान के बाद वापस लेने को लेकर विरोध प्रदर्शन कर लंबित 4 करोड़ 5 लाख प्रोत्साहन राशि तत्काल भुगतान करने मांग रखी।


कोरिया जिले में करीब 2700 मितानिनें कार्यरत हैं, जो कोरोना संक्रमण काल में अप्रैल 2020 से सितंबर 2021 तक गांव-गांव, शहर-शहर डोर टू डोर कार्य में जुटी थीं। अपनी जान जोखिम में डालकर कोविड जांच व वैक्सीनेशन में कदम से कदम मिलाकर जागरूक करती रहीं।

जगह-जगह कोरोना से बचाव व जागरुकता को लेकर दीवार लेखन, घर-घर जाकर हाथ धोना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, मास्क लगाने प्रेरित की थीं। मामले में राज्य सरकार (State Government) ने मितानिनों को हर महीने 1000 रुपए प्रोत्साहन राशि देने ऐलान किया था।

IMAGE CREDIT: Corona incentive money

बावजूद ब्लॉक कार्यालय से महज अप्रैल, मई व जून की प्रोत्साहन राशि बैंक में जमा कराई गई है। भुगतान की हुई प्रोत्साहन राशि को वापस मांगने की चर्चाएं होने लगी थीं। मामले में जिलेभर की मितानिनें एकजुट होकर सीएमएचओ कार्यालय पहुंची और जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

साथ ही 4 करोड़ 5 लाख लंबित प्रोत्साहन राशि का तत्काल भुगतान करने और मितानिनों के खाते में जमा 3 महीने की प्रोत्साहन राशि 86 लाख को वापस नहीं लेने मांग रखी।


कोरोना मरीज को हमने खिलाई थीं दवाइयां
आक्रोशित मितानिनों ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में पॉजिटिव मरीज को कोई डॉक्टर नहीं छूते थे, उसका इलाज नहीं होता था। उस समय हमने अपनी जान जोखिम में डालकर दवाइयां खिलाई थीं। हमने आरडी किट से ब्लड टेस्ट किया, कोरोना के लक्षण दिखाई देने पर दवाइयां खिलाई थीं।

कोरोना काल में कई गर्भवती महिलाओं का गर्भपात हुआ था। ऐसी परिस्थिति में हमने अपनी जान जोखिम में डालकर आम जनता की सेवा की। इससे कई मितानिनों की मौत हुई है।

मामले में राज्य सरकार ने कोरोना प्रोत्साहन के रूप में प्रत्येक मितानिन को 1000 रुपए देने ऐलान किया था। इस दौरान बेलासो राजवाड़े, सावित्री राजवाड़े, मंजू साहू, शिवकुमारी साहू, अन्नू कश्यप, प्रभा यादव, आरती दुबे, निर्मला साहू, सुमिता कुर्रे, श्याम बाई, सीमा भगत सहित जिलेभर की मितानिन मौजूद थीं।


राशि नहीं ली जाएगी वापस
राज्य सरकार से प्रोत्साहन राशि भुगतान करने आदेश आया था, जिसमें किस मद से भुगतान करना है, इस बात का उल्लेख नहीं था। मामले में हमने तीन महीने का भुगतान किया है। जिससे राज्य सरकार ने हमसे जवाब मांगा है। मितानिनों को भुगतान की गई राशि वापस नहीं ली जाएगी।
रंजना पैकरा, डीपीएम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कोरिया